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Haryana Electricity Bill Hike: बिजली उपभोक्ताओं को झटका! हरियाणा में सरचार्ज बढ़ाने की तैयारी, जानें आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर

AAmandeep Singh
बिजली उपभोक्ताओं को झटका! हरियाणा में सरचार्ज बढ़ाने की तैयारी, जानें आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर
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हरियाणा। हरियाणा के घरेलू और औद्योगिक बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाले दिन जेब पर भारी पड़ सकते हैं। प्रदेश की दोनों बिजली वितरण कंपनियों, उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) ने अतिरिक्त बिजली खरीद लागत की वसूली के लिए विनियामक आयोग के सामने अर्जी लगाई है। हालांकि, इस पर अंतिम फैसला 14 मई को होना था, लेकिन हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने इस जनसुनवाई को स्थगित करते हुए अब 10 जून की नई तारीख मुकर्रर की है। 10 जून को होने वाली यह बैठक तय करेगी कि प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं के मासिक बजट में कितना ‘करंट’ लगेगा।

क्या है कंपनियों का तर्क? किस्तों में वसूली का ‘सॉफ्ट’ प्रस्ताव

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बिजली निगमों का कहना है कि पिछले कुछ समय में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू स्तर पर बिजली खरीद की कीमतों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। इस घाटे की भरपाई के लिए कंपनियों ने उपभोक्ताओं से 47 पैसे प्रति यूनिट की दर से राशि वसूलने की अनुमति मांगी है। कंपनियों ने चालाकी से यह प्रस्ताव भी रखा है कि जनता पर एकमुश्त बोझ डालने के बजाय इस राशि को आगामी वर्षों में चरणबद्ध (Step-by-Step) तरीके से वसूला जाए। उनका तर्क है कि इससे मौजूदा बिजली दरें स्थिर बनी रहेंगी और उपभोक्ताओं को किस्तों में भुगतान की सुविधा मिलेगी।

जेब पर कितना पड़ेगा असर? गणित समझ लीजिए

अगर आयोग बिजली निगमों के इस प्रस्ताव पर मुहर लगा देता है, तो इसका सीधा गणित आपकी मासिक खपत से जुड़ा होगा:

200 यूनिट खपत: यदि आपका परिवार महीने में 200 यूनिट बिजली खर्च करता है, तो आपके बिल में करीब 94 रुपये का अतिरिक्त बोझ जुड़ेगा।

500 यूनिट खपत: मध्यम और बड़े परिवारों के लिए, जहां खपत 500 यूनिट तक जाती है, वहां बिल में लगभग 235 रुपये की बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।

औद्योगिक और व्यावसायिक कनेक्शनों के लिए यह राशि हजारों में हो सकती है, जिससे छोटे उद्योगों की लागत बढ़ना निश्चित है।

“जनता क्यों भुगते निगमों की नाकामी?” – उपभोक्ता संगठनों ने खोला मोर्चा

बिजली कंपनियों के इस कदम का विरोध भी शुरू हो गया है। उपभोक्ता संगठनों का तर्क है कि बिजली निगम अपनी वित्तीय अक्षमताओं, लाइन लॉस और खराब प्रबंधन का ठीकरा सीधा आम जनता के सिर पर फोड़ना चाहते हैं। संगठनों ने मांग की है कि आयोग को सरचार्ज की अनुमति देने से पहले वितरण कंपनियों के पिछले खर्चों और लागत प्रबंधन की गहन समीक्षा करनी चाहिए।

10 जून की सुनवाई पर टिकी नजरें

आयोग ने स्पष्ट किया है कि वह कोई भी फैसला एकतरफा नहीं लेगा। 10 जून को होने वाली जनसुनवाई में बिजली निगमों के साथ-साथ उपभोक्ता संगठनों और आम जनता की आपत्तियां व सुझाव सुने जाएंगे। अब सबकी नजरें आयोग के पाले में हैं—क्या वह कंपनियों के घाटे को कम करने के लिए जनता की जेब पर कैंची चलाने की अनुमति देगा, या कोई बीच का रास्ता निकाला जाएगा?

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