Haryana Electricity Strike: गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनी को पैरलल लाइसेंस दिए जाने के विरोध में हरियाणा के करीब 40 हजार बिजली कर्मियों और इंजीनियरों की तीन दिवसीय हड़ताल गुरुवार को शुरू हो गई। पहले ही दिन हड़ताल का असर पूरे प्रदेश में देखने को मिला। राज्य के अधिकांश हिस्सों में हजारों फीडर ब्रेकडाउन होने से बिजली गुल हो गई, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। बिजली न होने के कारण पानी की सप्लाई चरमरा गई, उद्योग-धंधे ठप पड़ गए और ऑनलाइन कामकाज पर भी इसका गहरा असर पड़ा। इसके अलावा अनाज मंडियों में धान की खरीद और उठान का काम भी बुरी तरह प्रभावित हुआ।
पटवारी और पुलिसकर्मी रहे बेबस, सड़कों पर उतरा गुस्सा
सरकार ने बिजली सप्लाई सुचारू रखने के लिए पड़ोसी राज्यों पंजाब और हिमाचल से तकनीकी कर्मचारियों की मांग की थी, लेकिन वहां के संगठनों ने आने से साफ इनकार कर दिया। आपातकालीन व्यवस्था के तौर पर पावर हाउसों और सब-स्टेशनों पर पटवारियों और पुलिस कर्मियों की ड्यूटी जरूर लगाई गई, लेकिन तकनीकी जानकारी न होने के कारण वे केवल फोन पर शिकायतें ही दर्ज करते रहे। किसी भी फाल्ट को ठीक करने में वे पूरी तरह विफल साबित हुए।
नतीजतन, जगह-जगह फाल्ट ठीक न होने से प्रदेशभर में ब्लैक आउट जैसे हालात पैदा हो गए। करनाल और फरीदाबाद में बिजली न आने से गुस्साए लोगों ने सड़कों पर जाम लगा दिया। वहीं, भिवानी के सुरपुरा कलां गांव में एक दर्दनाक हादसा भी सामने आया, जहां खुद ट्रांसफार्मर ठीक करने चढ़े कासनी खुर्द गांव के 50 वर्षीय किसान बलवान की करंट लगने से मौत हो गई।
किसान और मजदूर संगठनों का मिला समर्थन
बिजली कर्मियों की इस हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा के घटक संगठनों, सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा और सीटू, एटक, इंटक व एआइयूटीयूसी जैसे मजदूर संगठनों का पूरा समर्थन मिला है। कई जिलों में कर्मचारियों और किसानों ने मिलकर प्रदर्शन किए। इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा और ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने भी पैरलल लाइसेंस का पुरजोर विरोध करते हुए आंदोलन को समर्थन दिया है।
हिसार और पंचकूला मुख्यालयों से लेकर गुरुग्राम, हांसी, कुरुक्षेत्र, महेंद्रगढ़, झज्जर, फरीदाबाद, पानीपत, रोहतक, जींद, कैथल, करनाल, यमुनानगर और अंबाला तक हड़ताल का व्यापक असर दिखाई दिया। कर्मचारी नेताओं ने जनता को हो रही परेशानी के लिए खेद जताते हुए स्पष्ट किया कि यह लड़ाई सिर्फ कर्मचारियों की नहीं, बल्कि आम उपभोक्ताओं और किसानों को महंगी बिजली से बचाने के लिए है।
राजनीतिक हलचल और सरकार का पक्ष
विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। पूर्व वित्त मंत्री एवं इनेलो के राष्ट्रीय संरक्षक प्रो. संपत सिंह ने मांग की है कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी तत्काल विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108 का इस्तेमाल करते हुए एचईआरसी (हरियाणा बिजली विनियामक आयोग) के इस फैसले को रद्द करें। उन्होंने चेतावनी दी कि समानांतर लाइसेंस से सरकारी निगमों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा और इसका सीधा वित्तीय बोझ आम जनता पर पड़ेगा।
दूसरी ओर, ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि सरकार पूरी तरह कर्मचारियों के साथ है, लेकिन यह हड़ताल बेवजह है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निजी कंपनी को बिजली देने का आदेश एचईआरसी ने दिया है, जो कि एक स्वायत्त संस्था है। सरकार या विभाग ने निजीकरण के लिए कोई आवेदन नहीं मांगा था, लेकिन केंद्रीय एक्ट के प्रावधानों के तहत कोई भी कंपनी आवेदन कर सकती है। विभाग ने इस फैसले का कानूनी तौर पर कड़ा विरोध भी किया था। फिलहाल हड़ताल के दूसरे दिन भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और आमजन को बिजली संकट से जूझना पड़ रहा है।

