हरियाणा। हरियाणा में उद्यमियों के लिए राहत की एक नई इबारत लिखी गई है। सरकार ने हरियाणा उद्यम प्रोत्साहन नियम-2016 के पुराने ढर्रे को बदलते हुए नियम-7 के उपनियम (1) में बड़ा संशोधन किया है।
अब उद्योगों से संबंधित मंजूरियों की प्रक्रिया को पारदर्शी और त्वरित बनाने के लिए 18 सदस्यीय जिला स्तरीय समाशोधन समिति (District Level Clearing Committee) का मोर्चा तैयार किया गया है। संबंधित जिले का उपायुक्त इस पूरी टीम का ‘कैप्टन’ होगा, जिसके पास विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी बतौर सदस्य मौजूद रहेंगे। इस कदम से उद्यमियों को एक ही छत के नीचे (Single Window) समाधान मिल सकेगा।
MSME सेक्टर को नई जान देने की तैयारी
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, इन नए नियमों को ‘हरियाणा उद्यम प्रोत्साहन (संशोधन) नियम, 2026’ के तौर पर लागू किया गया है। सरकारी हलकों में इसे सैनी सरकार का एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ माना जा रहा है, क्योंकि हरियाणा की अर्थव्यवस्था में लघु, सूक्ष्म और मध्यम उद्योगों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है।
नई नीति का सीधा असर जमीन आवंटन, बिजली कनेक्शन और पर्यावरण संबंधी शुरुआती क्लीयरेंस पर पड़ेगा। जब फाइलें सचिवालय की धूल नहीं फांकेंगी, तो निवेश की रफ्तार अपने आप तेज होगी, जिसका सीधा फायदा प्रदेश के युवाओं को रोजगार के रूप में मिलेगा।
रोजगार और निवेश: एक तीर से दो निशाने
प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि इस संशोधन का असली मकसद ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को केवल कागजों तक सीमित न रखकर धरातल पर उतारना है। जिला स्तरीय समिति बनने से स्थानीय स्तर पर आने वाली तकनीकी बाधाओं को मौके पर ही निपटाया जा सकेगा।
इससे न केवल बाहरी निवेशक हरियाणा की ओर आकर्षित होंगे, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए अपने जिले में ही नौकरी के अवसर पैदा होंगे। आने वाले दिनों में औद्योगिक क्लस्टर्स के विकास में यह समिति रीढ़ की हड्डी साबित होगी, जिससे राज्य का औद्योगिक ग्राफ नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार है।

