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Haryana Farmer Scheme: हरियाणा के किसानों की बल्ले-बल्ले: धान छोड़ने पर मिलेंगे 8 हजार रुपये एकड़, जानें पूरी स्कीम

AAmandeep Singh
हरियाणा के किसानों की बल्ले-बल्ले: धान छोड़ने पर मिलेंगे 8 हजार रुपये एकड़, जानें पूरी स्कीम
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हरियाणा। चंडीगढ़ के गलियारों से किसानों के लिए एक ऐसी खबर आई है जो सीधे उनकी जेब और खेत की सेहत से जुड़ी है। हरियाणा सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी योजना ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ को नए कलेवर में पेश करते हुए प्रोत्साहन राशि का ऐलान किया है। प्रदेश में जिस रफ्तार से पाताल का पानी नीचे जा रहा है, उसे देखते हुए सरकार अब किसानों को धान की पारंपरिक खेती से दूर ले जाने की कोशिश में है। अब अगर कोई किसान अपने एक एकड़ खेत में धान की जगह कपास, मक्का, ज्वार या कोई भी बागवानी फसल लगाता है, तो सरकार उसके खाते में 8 हजार रुपये ट्रांसफर करेगी। यह कदम न केवल पर्यावरण के लिए जरूरी है, बल्कि उन किसानों के लिए भी सहारा है जो सिंचाई की बढ़ती लागत से परेशान हैं।

सिर्फ फसल बदलना ही नहीं, खेत खाली रखने पर भी मिलेगा लाभ

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इस योजना की सबसे दिलचस्प बात यह है कि सरकार केवल फसल बदलने पर ही मेहरबान नहीं है। यदि कोई किसान अपनी जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए उसे खरीफ सीजन के दौरान खाली छोड़ देता है, तब भी उसे इस योजना के दायरे में रखा जाएगा। कृषि विभाग के अधिकारियों का मानना है कि धान में पानी की खपत सबसे ज्यादा होती है, जिससे हरियाणा के कई जिलों में जल संकट खड़ा हो गया है। धान के बदले वैकल्पिक फसलों जैसे- खरीफ की दालें, तिलहन या सब्जियां उगाने से न केवल पानी बचेगा, बल्कि किसानों को बाजार में इनके अच्छे दाम भी मिल सकेंगे। सरकार का लक्ष्य साफ है- ‘कम पानी, ज्यादा मुनाफा’।

रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया और विशेषज्ञों की राय

योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को ज्यादा भाग-दौड़ करने की जरूरत नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि लाभ केवल उन्हीं को मिलेगा जो ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर अपनी जमीन और बोई गई नई फसल का पूरा विवरण दर्ज करेंगे। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि हरियाणा के दक्षिणी और मध्य हिस्सों में जहाँ पानी की किल्लत बढ़ रही है, वहां यह योजना गेम-चेंजर साबित हो सकती है। विभाग ने अपील की है कि किसान समय रहते पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराएं ताकि वेरिफिकेशन के बाद प्रोत्साहन राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जा सके। भविष्य की खेती को सुरक्षित बनाने की दिशा में यह हरियाणा सरकार का एक बड़ा दांव माना जा रहा है।

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