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Haryana Farmers News: गुरुग्राम में मनोहर लाल और किसान नेताओं के बीच 4 घंटे चली मैराथन बैठक, इन मुद्दों पर बनी बात

AAmandeep Singh
Haryana Farmers News:  गुरुग्राम में मनोहर लाल और किसान नेताओं के बीच 4 घंटे चली मैराथन बैठक, इन मुद्दों पर बनी बात

गुरुग्राम में मनोहर लाल और किसान नेताओं के बीच 4 घंटे चली मैराथन बैठक, इन मुद्दों पर बनी बात

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Haryana Farmers News: केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध को खत्म करने की दिशा में एक बड़ी पहल देखने को मिली है। गुरुग्राम में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल और संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के प्रतिनिधिमंडल के बीच देर रात 11 बजे तक करीब 4 घंटे लंबी मैराथन बैठक हुई। इस वार्ता में देश के विभिन्न राज्यों से आए 13 किसान प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और अपनी 10 प्रमुख मांगों का विस्तृत चार्टर केंद्रीय मंत्री को सौंपा।

बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने दावा किया कि बातचीत सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई है। उन्होंने कहा कि किसानों की मांगों को लेकर संबंधित मंत्रालयों से चर्चा की जाएगी और जल्द से जल्द समाधान निकाला जाएगा। वहीं दूसरी तरफ, किसान नेताओं ने रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकार से इस बार पॉजिटिव रिस्पांस जरूर मिला है, लेकिन वे पूरी तरह संतुष्ट तभी होंगे जब इन आश्वासनों को जमीनी धरातल पर लागू किया जाएगा।

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हर एक प्वाइंट पर हुई गंभीर चर्चा, भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर मिला बड़ा भरोसा

संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक जगदीप सिंह डल्लेवाल ने बैठक के बाद बताया कि टेबल टॉक बेहद गंभीर और विस्तृत रही। 4 घंटे चले इस सीधे संवाद में किसानों ने अपनी आशंकाओं और व्यावहारिक दिक्कतों को बेबाकी से रखा। वार्ता के दौरान भारत-अमेरिका ट्रेड डील, एमएसपी की कानूनी गारंटी, हाई-टेंशन बिजली लाइनों का मुआवजा, स्मार्ट मीटर, बिजली सब्सिडी और भूमि अधिग्रहण कानून जैसे मुद्दों पर आमने-सामने बातचीत हुई।

बैठक में सबसे बड़ा मोड़ भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर आया। किसानों की आशंका थी कि इस अंतरराष्ट्रीय समझौते से देसी कृषि और डेयरी सेक्टर को भारी चपत लगेगी। इस पर केंद्रीय मंत्री ने साफ आश्वासन दिया कि खेती-किसानी और डेयरी सेक्टर को इस डील से पूरी तरह बाहर रखा जाएगा और सरकार जल्द ही इस संबंध में आधिकारिक बयान जारी करेगी।

एमएसपी, मुकदमों की वापसी और मुआवजा नीति पर सरकार का रुख

एमएसपी पर कानूनी गारंटी और फसलों के उचित दाम की पुरानी मांग पर केंद्रीय मंत्री ने भरोसा दिलाया कि वे खुद कृषि मंत्रालय से बात कर किसानों और मंत्रालय के उच्च अधिकारियों के बीच सीधी वार्ता कराएंगे। इसके अलावा, खेतों से गुजरने वाली हाई-टेंशन (HT) पावर लाइनों के मुआवजे को लेकर किसानों के पक्ष में एक नई और पारदर्शी नीति बनाने पर भी सहमति जताई गई है।

आंदोलन के दौरान देशभर में किसानों पर दर्ज हुए पुलिस केस वापस लेने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। इसके साथ ही, वर्ष 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के प्रावधानों को दोबारा लागू करने की बात रखी गई, जिसमें जमीन अधिग्रहण से पहले 75 फीसदी किसानों की सहमति और बाजार दर से 4 गुना मुआवजा देने का नियम था। सरकार ने इन सभी बिंदुओं पर जल्द फैसला लेने का संकेत दिया है।

5 से 10 दिन में दिखेगा असर, किसान बोले— धरातल पर काम हुआ तो मानेंगे बात

बैठक के बाद एसकेएम (गैर-राजनीतिक) के सचिव हरदीप सिंह गिल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि फिलहाल सरकार से केवल आश्वासन मिला है और आने वाला समय ही तय करेगा कि नीतियां कितनी किसान-हितैषी बनती हैं। उन्होंने कहा कि यदि अगले 5 से 10 दिनों के भीतर सरकार हमारी 2-3 प्रमुख मांगों को पूरा कर देती है, तो किसानों का भरोसा बहाल होगा।

किसानों का कहना है कि वे किसी टकराव के मूड में नहीं हैं, लेकिन अपनी वाजिब मांगों को लेकर कोई समझौता भी नहीं करेंगे। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार इस बैठक में दिए गए आश्वासनों को कितनी जल्दी कागजी फैसलों में बदलती है।

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