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Haryana Old Age Pension Rule: हरियाणा के बुजुर्ग किसानों पर दोहरी मार: फसल बेचें या पेंशन बचाएं?

AAmandeep Singh
हरियाणा के बुजुर्ग किसानों पर दोहरी मार: फसल बेचें या पेंशन बचाएं?
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हरियाणा। हरियाणा की ग्रामीण बेल्ट में इन दिनों गेहूं और सरसों की कटाई से ज्यादा चर्चा सरकार के उस ‘पेंशन नियम’ की हो रही है, जिसने बुजुर्ग किसानों को चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। मामला प्रदेश सरकार की बुढ़ापा पेंशन योजना और परिवार पहचान पत्र (PPP) से जुड़ा है। नियम के मुताबिक, यदि किसी बुजुर्ग के परिवार की सालाना आय 3 लाख रुपये से अधिक होती है, तो उनकी पेंशन रोक दी जाती है। अब दिक्कत यह है कि अगर किसान मंडी में अपनी फसल एमएसपी पर बेचता है, तो उसका रिकॉर्ड सीधे सरकारी डेटा में चला जाता है, जिससे उसकी सालाना आय कागजों पर बढ़ जाती है।

पोर्टल पर पंजीकरण से कतरा रहे किसान

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यही वजह है कि अब बुजुर्ग किसान ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर अपनी फसल का पंजीकरण करवाने से भाग रहे हैं। किसानों को डर है कि पोर्टल पर दर्ज जानकारी और मंडी में कटना वाला ‘J-फॉर्म’ उनकी पेंशन पर कैंची चला देगा। यदि किसान पोर्टल पर पंजीकरण नहीं करता, तो वह सरकारी एमएसपी का लाभ नहीं ले पाएगा। ऐसे में उसे अपनी मेहनत की कमाई निजी व्यापारियों को औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ेगी। यानी एक तरफ कुआं है और दूसरी तरफ खाई—या तो फसल का सही दाम छोड़ें या फिर बुढ़ापे की लाठी (पेंशन)।

समाज कल्याण विभाग के चक्कर काट रहे बुजुर्ग

प्रदेश में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं जहां बुजुर्गों की पेंशन अचानक बंद हो गई। जब पीड़ितों ने समाज कल्याण विभाग के दफ्तरों के चक्कर काटे, तो पता चला कि पिछले सीजन में बेची गई फसल की वजह से उनकी आय सीमा 3 लाख रुपये को पार कर गई थी। किसानों का तर्क है कि फसल बेचने से मिलने वाला पूरा पैसा मुनाफा नहीं होता; उसमें बीज, खाद, डीजल और मजदूरी का बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता है। लेकिन सरकारी सिस्टम में फसल की कुल बिक्री को ही आय मान लिया जाता है, जो किसानों के लिए गले की फांस बन गया है।

J-फॉर्म कटते ही ‘ट्रैक’ हो जाती है कमाई

मंडी में फसल बेचने की प्रक्रिया अब पूरी तरह डिजिटल है। किसान जैसे ही आढ़ती के जरिए फसल बेचता है, उसका ऑनलाइन J-फॉर्म कट जाता है। यह J-फॉर्म सीधे किसान के बैंक खाते और उसकी पीपीआई (PPP) आईडी से लिंक होता है। जैसे ही भुगतान किसान के खाते में आता है, सरकारी सॉफ्टवेयर उसे वार्षिक आय में जोड़ देता है। इसी तकनीकी लिंकेज ने अब उन छोटे और मध्यम किसानों की चिंता बढ़ा दी है, जो खेती के साथ-साथ बुढ़ापा पेंशन के सहारे अपना गुजारा कर रहे हैं। फिलहाल, किसान संगठन इस नियम में बदलाव की मांग कर रहे हैं ताकि फसल की बिक्री को शुद्ध आय न माना जाए।

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