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Haryana Fisheries Subsidy: हरियाणा के मत्स्य पालकों की बल्ले-बल्ले: 40 दिन में मिलेगी सब्सिडी, सरकार ने तय की डेडलाइन

AAmandeep Singh
हरियाणा के मत्स्य पालकों की बल्ले-बल्ले: 40 दिन में मिलेगी सब्सिडी, सरकार ने तय की डेडलाइन
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हरियाणा। हरियाणा के मत्स्य पालकों के लिए चंडीगढ़ से राहत भरी खबर आई है। प्रदेश सरकार ने मत्स्य पालन व्यवसाय को सुगम बनाने के लिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की ओर से जारी आदेशों के मुताबिक, अब मछली पालन से जुड़ी सरकारी सुविधाओं के लिए किसानों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। सघन मत्स्य पालन विकास कार्यक्रम के तहत खरीदे जाने वाले लोडिंग ऑटो, चारपहिया वाहन और ट्रॉली युक्त मिनी ट्रैक्टरों पर सब्सिडी की राशि अब आवेदन के मात्र 40 दिनों के भीतर मंजूर करनी होगी।

PMMSY के तहत आधुनिक परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार

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सरकार का फोकस केवल पारंपरिक मछली पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक तकनीकों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। नई अधिसूचना के तहत, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की महत्वपूर्ण कड़ियों जैसे—न्यूक्लियस प्रजनन केंद्रों (NBC) की स्थापना, स्टार्टअप्स, इन्क्यूबेटर्स और पायलट प्रोजेक्ट्स के लिए मिलने वाली आर्थिक मदद को भी समयबद्ध कर दिया गया है। इसके अलावा, ताजे पानी की सजावटी मछलियों (Ornamental Fish) के प्रजनन, कोल्ड स्टोरेज के आधुनिकीकरण और ई-मार्केटिंग प्लेटफॉर्म तैयार करने के लिए मिलने वाली सब्सिडी अब 50 दिनों के भीतर प्रदान की जाएगी।

त्रि-स्तरीय निगरानी तंत्र: अब अधिकारी नहीं कर सकेंगे टालमटोल

प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता और तेजी लाने के लिए सरकार ने त्रि-स्तरीय अपील प्रणाली लागू की है।

पदनामित अधिकारी: जिला मत्स्य पालन अधिकारी (DFO) को प्राथमिक जिम्मेदारी सौंपी गई है।

प्रथम अपीलीय अधिकारी: यदि समय पर काम नहीं होता, तो संबंधित उपनिदेशक मत्स्य पालन के पास अपील की जा सकेगी।

द्वितीय अपीलीय अधिकारी: अंतिम स्तर पर निदेशक मत्स्य पालन को जवाबदेह बनाया गया है।

मुख्य सचिव ने साफ कर दिया है कि समय-सीमा का उल्लंघन होने पर संबंधित अधिकारी को सेवा के अधिकार अधिनियम के तहत दंड भुगतना पड़ सकता है।

आत्मनिर्भर मछली पालकों के लिए ‘डिजिटल’ राह

इस नई व्यवस्था से न केवल मछली पालकों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि प्रदेश में मत्स्य निर्यात और मूल्य संवर्धन (Value Addition) को भी बढ़ावा मिलेगा। मछली उत्पादों के लिए ई-ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और कोल्ड चैन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए सरकार अब नकद सहायता के साथ-साथ ‘प्रशिक्षण और अनुभव’ कार्यक्रमों पर भी जोर दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रशासनिक सुधार से हरियाणा के युवाओं का रुझान मत्स्य पालन की ओर बढ़ेगा, जो राज्य की जीडीपी में कृषि क्षेत्र के योगदान को और मजबूती देगा।

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