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Haryana Land Measurement : हरियाणा में अब खत्म होगा जमीन का 'झगड़ा': सैटेलाइट तकनीक से होगी डिजिटल पैमाइश, पटवारी नहीं मशीन तय करेगी सरहद

GGaganpreet Kaur
हरियाणा में अब खत्म होगा जमीन का 'झगड़ा': सैटेलाइट तकनीक से होगी डिजिटल पैमाइश, पटवारी नहीं मशीन तय करेगी सरहद
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चंडीगढ़ (जग मार्ग)। हरियाणा में जमीन की मेड़ और सीमांकन को लेकर होने वाली खूनी रंजिशें और बरसों तक चलने वाली अदालती कार्रवाई अब गुजरे जमाने की बात होने वाली है। मुख्यमंत्री नायब सैनी के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार ने राजस्व प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव करते हुए ‘ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट’ (GNSS) रोवर मशीन से पैमाइश को अनिवार्य कर दिया है। इस नई डिजिटल व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब पैमाइश में न तो पटवारी की मनमर्जी चलेगी और न ही रिकॉर्ड के साथ किसी तरह की मानवीय छेड़छाड़ संभव होगी।

सटीकता ऐसी कि इंच भर की भी गलती नहीं

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राजस्व विभाग द्वारा अपनाई गई यह नई GNSS तकनीक सीधे सैटेलाइट से सिग्नल प्राप्त करती है। अक्षांश और देशांतर (Latitude & Longitude) के आधार पर काम करने वाली यह मशीन केवल एक से दो सेंटीमीटर के अंतर तक की सटीक जानकारी देती है। डेटा की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए पूरे प्रदेश में 19 कंटीन्यूअसली ऑपरेटिंग रेफरेंस स्टेशन (CORS) का एक जाल बिछाया गया है। पैमाइश से पहले मशीन में गांव का डिजिटल नक्शा (शजरा) फीड किया जाता है, जिससे मौके पर किसी भी तरह के पक्षपात की आशंका खत्म हो जाती है।

भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम, सीधा सर्वर पर जाएगा डेटा

राजस्व मंत्री विपुल गोयल के अनुसार, रोवर मशीन द्वारा एकत्रित किया गया सारा डेटा सीधे विभाग के मुख्य सर्वर पर अपलोड होगा। इससे पैमाइश की रिपोर्ट में बाद में बदलाव करना नामुमकिन होगा। सरकार ने इसके लिए सभी जिलों की तहसीलों में रोवर मशीनें उपलब्ध करा दी हैं और पटवारियों व कानूनगो को विशेष तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया गया है। डिजिटल पैमाइश के लिए विभाग के ई-जीआरएस पोर्टल पर आवेदन की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है, जिसे लेकर भू-मालिकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।

क्या होगा पैमाइश का खर्च?

सरकार ने इस डिजिटल सेवा के लिए पारदर्शी शुल्क ढांचा तैयार किया है:

कृषि भूमि: ग्रामीण क्षेत्रों में पहले एक एकड़ के लिए 1,000 रुपये शुल्क तय किया गया है। इसके बाद प्रत्येक अतिरिक्त एकड़ के लिए 500 रुपये और 500 रुपये स्थानीय कमीशन देना होगा।

गैर-कृषि भूमि (फार्म हाउस आदि): पहले एक एकड़ का शुल्क 2,000 रुपये, अतिरिक्त एकड़ पर 500 रुपये और 500 रुपये स्थानीय कमीशन रहेगा।

शहरी क्षेत्र: 500 वर्ग गज तक के प्लॉट के लिए 2,000 रुपये और इससे बड़े प्लॉट के लिए 3,000 रुपये (साथ में 1,000 रुपये कमीशन) निर्धारित है।

इन सभी शुल्कों का भुगतान आवेदकों को ऑनलाइन ही करना होगा, जिससे बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह खत्म हो जाएगी। इस कदम से न केवल पारि वारिक विवाद सुलझेंगे, बल्कि रियल एस्टेट और कृषि क्षेत्र में निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।

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