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SYL Canal News Haryana: SYL नहर पर हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: 50 करोड़ से बदलेगी सूरत, टेंडर प्रक्रिया हुई शुरू

AAmandeep Singh
SYL नहर पर हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: 50 करोड़ से बदलेगी सूरत, टेंडर प्रक्रिया हुई शुरू
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हरियाणा। दशकों से केवल कागजों और चुनावी भाषणों में सिमट कर रह गई SYL (सतलुज-यमुना लिंक) नहर अब धरातल पर अपने पुराने स्वरूप में लौटने को तैयार है। पंजाब के साथ जारी राजनीतिक गतिरोध और सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले के बीच, हरियाणा सरकार ने नहर के अपने हिस्से के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। सरकार ने नहर के कायाकल्प के लिए 50 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दे दी है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य न केवल नहर की जल वहन क्षमता को बढ़ाना है, बल्कि मानसून के दौरान मारकंडा जैसी नदियों से आने वाली तबाही को रोकना भी है।

तीन चरणों में होगा ‘मिशन कायाकल्प’, टेंडर प्रक्रिया शुरू

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सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस विशाल परियोजना को तीन चरणों में विभाजित किया गया है। पहले चरण के लिए 15 करोड़ रुपये की राशि जारी कर दी गई है। कुरुक्षेत्र जिले में पड़ने वाली इस नहर की लंबाई करीब 35 किलोमीटर है, जो लंबे समय से रखरखाव के अभाव में बदहाल थी। सिंचाई विभाग के एक्सईएन मुनीष बब्बर ने पुष्टि की है कि सरकार से तकनीकी मंजूरी मिलने के बाद अब टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही मौके पर मशीनें उतरेंगी और नहर की सफाई व मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर शुरू होगा।

10 हजार क्यूसेक पानी का लक्ष्य: प्यासे कंठों तक पहुंचेगी राहत

इस परियोजना के पीछे सरकार का विजन बेहद दूरगामी है। जीर्णोद्धार के बाद इस नहर तंत्र की क्षमता इतनी विकसित हो जाएगी कि जरूरत पड़ने पर नरवाना ब्रांच और मारकंडा नदी के पानी को भी इसमें छोड़ा जा सकेगा। विभाग ने लक्ष्य रखा है कि इस पूरे सिस्टम के जरिए दक्षिण हरियाणा तक कुल 10,000 क्यूसेक पानी पहुंचाया जाए। इसमें 6,500 क्यूसेक पानी अकेले SYL नहर वहन करेगी, जबकि 3,500 क्यूसेक पानी नरवाना ब्रांच के जरिए भेजा जाएगा। यह पहली बार है जब सरकार ने विवादित नहर के ढांचे को एक वैकल्पिक जल मार्ग के रूप में इस्तेमाल करने की इतनी बड़ी योजना बनाई है।

बाढ़ नियंत्रण में मिलेगी संजीवनी

विशेषज्ञों का मानना है कि इस जीर्णोद्धार से कुरुक्षेत्र और आसपास के इलाकों को दोहरी राहत मिलेगी। एक तरफ जहां दक्षिण हरियाणा को पानी मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ बरसात के दिनों में मारकंडा नदी का उफान, जो अक्सर तबाही लाता है, उसे SYL नहर में डाइवर्ट कर नियंत्रित किया जा सकेगा। जनवरी में भेजी गई इस फाइल को तकनीकी टीम की हरी झंडी मिलना प्रदेश की जल प्रबंधन नीति के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है। हालांकि पंजाब से पानी मिलने का मामला अभी भी अधर में है, लेकिन हरियाणा ने अपने हिस्से की तैयारी पूरी कर यह साफ कर दिया है कि वह अपनी जनता के हक के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर पीछे नहीं हटेगा।

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