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Haryana Govt Employees : हरियाणा सरकार का बड़ा तोहफा: कर्मचारियों को अब सीधे बजट से मिलेगा लोन, PNB से समझौता खत्म

AAmandeep Singh
हरियाणा सरकार का बड़ा तोहफा: कर्मचारियों को अब सीधे बजट से मिलेगा लोन, PNB से समझौता खत्म
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हरियाणा। हरियाणा के सरकारी अमले के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश सरकार ने अपने कर्मचारियों को वित्तीय संबल देने की दिशा में एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। साढ़े नौ साल पुराने बैंकिंग समझौते को किनारे करते हुए अब सरकार ने तय किया है कि वह अपने कर्मचारियों को मकान, गाड़ी, कंप्यूटर और शादी-ब्याह जैसे जरूरी कामों के लिए अपने खजाने (बजट) से सीधा लोन मुहैया कराएगी।

यह नई व्यवस्था 1 जून 2026 से पूरे प्रदेश में प्रभावी हो जाएगी। वित्त विभाग ने इस बाबत सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों और जिला प्रशासन के आला अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

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बैंक की भागदौड़ और जटिल शर्तों से निजात

बीते करीब एक दशक से हरियाणा के सरकारी कर्मचारी अपनी निजी जरूरतों के लिए बैंक की शर्तों और लंबी कागजी कार्रवाई के बीच पिस रहे थे। दरअसल, 4 नवंबर 2016 को तत्कालीन सरकार ने एक आदेश जारी कर कर्मचारियों के लोन पोर्टफोलियो को पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में स्थानांतरित कर दिया था। इसके बाद से ही कर्मचारियों को लोन के लिए बैंक के चक्कर काटने पड़ते थे। अब सरकार ने इस ‘आउटसोर्स’ व्यवस्था को खत्म कर पुरानी ‘डायरेक्ट लोन’ नीति को बहाल कर दिया है।

क्या होगा इस फैसले का असर?

सरकार के इस कदम का सीधा मतलब है कि अब कर्मचारियों को लोन के लिए बैंक की दहलीज पर जाकर मिन्नतें नहीं करनी होंगी। विभाग के माध्यम से मिलने वाले इस कर्ज की प्रक्रिया न केवल सरल होगी, बल्कि ब्याज दरों और किस्तों के प्रबंधन में भी कर्मचारियों को सहूलियत मिलने की उम्मीद है। सरकार अपने वार्षिक बजट में ‘मेजर हेड- 7610’ के अंतर्गत इस राशि का प्रावधान करेगी, जिससे लोन स्वीकृत होने में लगने वाला समय भी काफी कम हो जाएगा।

अधिकारियों को मिलीं सख्त हिदायतें

वित्त विभाग ने इस संबंध में बेहद स्पष्ट रुख अपनाया है। प्रदेश के सभी मंडल आयुक्तों, उपायुक्तों, एसडीएम और यहां तक कि हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार व जिला सत्र न्यायाधीशों को भी पत्र भेजकर सूचित कर दिया गया है कि वे नई व्यवस्था के लिए तैयारियां मुकम्मल कर लें। हालांकि, विभाग ने यह भी साफ किया है कि यह बदलाव भविष्य के लोन के लिए है। जिन कर्मचारियों ने 2016 के समझौते के तहत बैंक से कर्ज लिया हुआ है, उन्हें अपनी पुरानी किस्तों का भुगतान संबंधित बैंक को ही करना होगा।

कर्मचारियों में खुशी की लहर

सरकार के इस फैसले का कर्मचारी संगठनों ने स्वागत किया है। उनका मानना है कि सरकार का अपने परिवार (कर्मचारियों) के प्रति यह भरोसा न केवल उनकी आर्थिक चिंताओं को कम करेगा, बल्कि कार्यक्षमता में भी सुधार लाएगा। खास तौर पर कंप्यूटर और विवाह ऋण जैसे छोटे लेकिन जरूरी अग्रिमों के लिए अब दफ्तर के भीतर ही समाधान मिल सकेगा।

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