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Haryana Mandi Rules: बड़ी राहत: हरियाणा सरकार ने बदली बायोमेट्रिक शर्त, 3 लोग बेच सकेंगे किसान की फसल

AAmandeep Singh
बड़ी राहत: हरियाणा सरकार ने बदली बायोमेट्रिक शर्त, 3 लोग बेच सकेंगे किसान की फसल
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हरियाणा। हरियाणा के अन्नदाता के लिए रबी मार्केटिंग सीजन (2026) की शुरुआत से पहले राहत भरी खबर आई है। प्रदेश की मंडियों में सरसों और गेहूं की सरकारी खरीद को लेकर बने सख्त नियमों में राज्य सरकार ने ढील दे दी है। अब न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसल बेचने के लिए किसान को खुद मंडी के गेट पर मौजूद रहना अनिवार्य नहीं होगा। मुख्यमंत्री कार्यालय से मिली मंजूरी के बाद अब किसान अपनी जगह किन्हीं तीन व्यक्तियों को अधिकृत कर सकेगा, जो उसकी अनुपस्थिति में बायोमेट्रिक सत्यापन (अंगूठा लगाकर) के जरिए गेट पास प्राप्त कर सकेंगे।

विरोध के आगे झुका प्रशासन: क्यों बदला गया नियम?

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दरअसल, सरकार ने पहले नियम बनाया था कि जिस किसान के नाम गिरदावरी दर्ज है, गेट पास के लिए उसी का बायोमेट्रिक मिलान जरूरी होगा। इस नियम का प्रदेश भर के किसान संगठनों और आढ़तियों ने कड़ा विरोध किया था। दलील दी गई थी कि कई बार किसान बीमार होता है या घर की अन्य व्यस्तताओं के कारण मंडी नहीं पहुंच पाता, ऐसे में उसकी फसल की एंट्री रुक जाती। इस ‘डेडलॉक’ को खत्म करने के लिए सरकार ने अब बीच का रास्ता निकाला है।

3 लोगों का ‘पावर ऑफ अटॉर्नी’: किसे मिलेगा अधिकार?

नई व्यवस्था के तहत, किसान ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर दर्ज जानकारी के आधार पर अपने परिवार के किसी सदस्य, किसी विश्वसनीय परिचित या फिर अपने आढ़ती को अधिकृत कर सकेगा। अधिकृत व्यक्ति जैसे ही बायोमेट्रिक मशीन पर अपना अंगूठा लगाएगा, सिस्टम किसान के डेटा से उसका मिलान कर गेट पास जारी कर देगा। इससे न केवल मंडियों में लगने वाली लंबी कतारें कम होंगी, बल्कि उन बुजुर्ग किसानों को भी राहत मिलेगी जो शारीरिक रूप से मंडी आने में असमर्थ हैं।

फोटो और नंबर प्लेट की शर्त अभी भी बरकरार

भले ही बायोमेट्रिक नियमों में ढील दी गई हो, लेकिन पारदर्शिता को लेकर सरकार का रुख अभी भी कड़ा है। मंडी के गेट पर फसल लेकर आने वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली या वाहन की फोटो अभी भी अनिवार्य रूप से खींची जाएगी। साथ ही, वाहन पर स्पष्ट नंबर प्लेट होना जरूरी है। इसका मकसद उत्तर प्रदेश या राजस्थान जैसे पड़ोसी राज्यों से आने वाली फसल की अवैध एंट्री को रोकना है, ताकि केवल हरियाणा के पंजीकृत किसानों को ही MSP का पूरा लाभ मिल सके।

आढ़ती और किसान संघों ने किया स्वागत

सरकार के इस फैसले का हिसार और सिरसा बेल्ट के आढ़तियों ने स्वागत किया है। अनाज मंडी एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि बायोमेट्रिक की अनिवार्यता व्यावहारिक नहीं थी, लेकिन ‘प्रतिनिधि’ की अनुमति मिलने से अब खरीद प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सकेगी। किसानों का कहना है कि अब उन्हें खेतों में कटाई छोड़कर दिन भर मंडी के गेट पर खड़े रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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