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Haryana Organic Farming: प्राकृतिक खेती करने वाले हरियाणा के किसानों की बल्ले-बल्ले, सरकार देगी ₹10,000 प्रति एकड़ सब्सिडी

AAmandeep Singh
Haryana Organic Farming: प्राकृतिक खेती करने वाले हरियाणा के किसानों की बल्ले-बल्ले, सरकार देगी ₹10,000 प्रति एकड़ सब्सिडी
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हरियाणा। हरियाणा के कृषि क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव आकार ले रहा है। गेहूं और धान के पारंपरिक चक्र और कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल से बेदम हो रही जमीन को पुनर्जीवित करने के लिए नायब सैनी सरकार ने खजाना खोल दिया है। चंडीगढ़ में एक प्रेसवार्ता के दौरान राज्य के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि सरकार सूबे के अन्नदाताओं को रासायनिक खादों का मोह छोड़ने के लिए न सिर्फ प्रेरित कर रही है, बल्कि उन्हें एक मजबूत आर्थिक सुरक्षा कवच भी दे रही है। नई नीति के तहत, जो भी किसान पारंपरिक तौर-तरीकों को छोड़कर पूर्ण रूप से प्राकृतिक या जैविक खेती को अपनाएगा, उसे सरकार की ओर से अगले पांच वर्षों तक 10,000 रुपये प्रति एकड़ की वार्षिक प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

‘एपीडा’ की मुहर खोलेगी अंतरराष्ट्रीय बाजारों के द्वार

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सरकार ने इस सब्सिडी योजना के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण शर्त भी जोड़ी है, जो दूरगामी रूप से किसानों के लिए ही फायदेमंद साबित होने वाली है। योजना का लाभ लेने के लिए उत्पादक किसानों को अपनी उपज का पंजीकरण और प्रमाणीकरण ‘कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण’ (APEDA) से करवाना होगा। कृषि मंत्री ने इस रणनीति के पीछे का तर्क समझाते हुए कहा, “एपीडा का सर्टिफिकेट मिलने से बाजार में हमारे किसानों की फसलों पर शुद्धता की गारंटी लग जाएगी। इससे बिचौलिए उनका शोषण नहीं कर पाएंगे और किसानों को न केवल स्थानीय मंडियों में, बल्कि सात समंदर पार वैश्विक बाजारों में भी अपनी फसलों के मनमाफिक और बेहद शानदार दाम मिलेंगे।”

बाजार में ‘ऑर्गेनिक’ की गूंज, सेहत सुधारने के साथ सुधरेगी आर्थिक स्थिति

वक्त के साथ उपभोक्ताओं की थाली और उनकी सोच दोनों में बड़ा बदलाव आया है। आज का जागरूक नागरिक महंगे दामों पर भी बिना केमिकल वाली सब्जियां और अनाज खरीदने को तैयार है। कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने इसी जमीनी हकीकत का जिक्र करते हुए कहा कि कोरोना काल के बाद से लोग अपने खान-पान और सेहत को लेकर बेहद गंभीर हो गए हैं। यही वजह है कि आज जैविक और प्राकृतिक उत्पादों की मांग दिन-प्रतिदिन आसमान छू रही है। किसानों के पास इस मांग को भांपकर अपनी तकदीर बदलने का यह सबसे सुनहरा मौका है।

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने से न केवल मानव स्वास्थ्य को कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचाया जा सकेगा, बल्कि मिट्टी की खोई हुई उर्वरा शक्ति और मित्र कीटों को भी नया जीवन मिलेगा, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए जमीन बंजर होने से बच जाएगी।

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