हरियाणा। हरियाणा के सरकारी कर्मचारियों के लिए पेंशन के मोर्चे पर एक बेहद अहम खबर आई है। प्रदेश की सैनी सरकार ने पेंशन नियमों में संशोधन करते हुए कर्मचारियों को यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को छोड़कर दोबारा न्यू पेंशन स्कीम (NPS) में शामिल होने का एकमुश्त अवसर दे दिया है। वित्त विभाग की ओर से इस संबंध में बकायदा आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। सरकार के इस कदम को प्रशासनिक हलकों में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अब तक कर्मचारी यूपीएस और एनपीएस के नफे-नुकसान को लेकर कशमकश में थे।
रिटायरमेंट से एक साल पहले लेना होगा फैसला, वापसी की राह बंद
वित्त विभाग की नई गाइडलाइन के मुताबिक, यह सुविधा हर किसी को मनमाने तरीके से नहीं मिलेगी। इसके लिए सरकार ने कुछ बेहद सख्त शर्तें तय की हैं। अधिसूचना में साफ कहा गया है कि जो कर्मचारी यूपीएस से निकलकर एनपीएस का दामन थामना चाहते हैं, उन्हें अपनी रिटायरमेंट की तारीख से ठीक एक साल पहले यह लिखित विकल्प चुनना होगा। अगर कोई कर्मचारी इस तय समय सीमा को चूक जाता है, तो वह चाहकर भी एनपीएस में नहीं जा पाएगा और उसे अनिवार्य रूप से यूपीएस का हिस्सा ही बने रहना होगा। सबसे बड़ी शर्त यह है कि यह बदलाव केवल एक बार के लिए ही मान्य होगा; एनपीएस में जाने के बाद कर्मचारी दोबारा कभी भी यूपीएस में वापस लौटने का दावा नहीं कर सकेगा।
बाजार के जोखिम और निश्चित पेंशन के बीच उलझे कर्मचारी
सरकार के इस फैसले ने राज्य के लाखों कर्मचारियों को एक बार फिर गुणा-भाग करने पर मजबूर कर दिया है। दरअसल, यूपीएस को जहां एक सुरक्षित और निश्चित पेंशन मॉडल के रूप में देखा जाता है, वहीं एनपीएस पूरी तरह मार्केट रिटर्न (बाजार के जोखिम और मुनाफे) पर आधारित है। कई युवा कर्मचारी, जिनकी नौकरी के लंबे साल बचे हैं, वे बाजार के अच्छे रिटर्न का फायदा उठाने के लिए एनपीएस को बेहतर मानते हैं। वहीं, रिटायरमेंट के नजदीक पहुंच चुके कर्मचारी तयशुदा रकम (UPS) को ज्यादा सुरक्षित मानते हैं। अब सरकार ने गेंद कर्मचारियों के पाले में डाल दी है कि वे अपने भविष्य और वित्तीय सुरक्षा को देखते हुए खुद अंतिम फैसला लें।

