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Haryana Government PPP Medical Cleaning: हरियाणा के तीन जिला अस्पतालों में प्राइवेट तर्ज पर होगी सफाई, सरकार का बड़ा फैसला

GGaganpreet Kaur
हरियाणा के तीन जिला अस्पतालों में प्राइवेट तर्ज पर होगी सफाई, सरकार का बड़ा फैसला
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हरियाणा के सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था को पटरी पर लाने और मरीजों को निजी अस्पतालों जैसी सुविधाएं देने के लिए प्रदेश सरकार ने एक महत्वाकांक्षी योजना को हरी झंडी दे दी है। सरकार अब गुरुग्राम, जींद और कुरुक्षेत्र के जिला अस्पतालों में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत मशीनीकृत सफाई और स्वच्छता सेवाएं शुरू करने जा रही है। इस नई पहल का मुख्य उद्देश्य अस्पतालों के भीतर, विशेष रूप से उन संवेदनशील हिस्सों में जहां गंभीर मरीज भर्ती होते हैं, वहां अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्वच्छता मानकों को लागू करना है।

हर साल खर्च होंगे साढ़े तीन करोड़, निजी कंपनियों के जिम्मे होगी व्यवस्था

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अस्पतालों को साफ और सुरक्षित रखने के इस बड़े प्रोजेक्ट के वित्तीय पहलुओं को देखें तो सरकार इन तीनों अस्पतालों में मशीनीकृत सफाई पर सालाना लगभग 3 से 3.5 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी कर चुकी है। इस बजट के जरिए अस्पताल परिसरों में आधुनिक मशीनों का बेड़ा उतारा जाएगा, जिससे पोछा लगाने से लेकर सैनिटाइजेशन तक का काम हाईटेक तरीके से होगा। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने इस संबंध में नीतिगत रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि किसी भी अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा, संक्रमण पर काबू पाने और इलाज के बेहतर नतीजों के लिए साफ-सुथरा वातावरण पहली शर्त है। इसी सोच के साथ इस प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारा जा रहा है।

वीआईपी जिलों से लेकर ग्रामीण बेल्ट तक को चमकाने की कवायद

इस योजना के लिए चुने गए तीन जिले रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं। गुरुग्राम जहां साइबर सिटी के रूप में वीआईपी मरीजों और बड़े लोड को संभालता है, वहीं जींद और कुरुक्षेत्र के अस्पतालों पर ग्रामीण और अर्ध-शहरी आबादी का भारी दबाव रहता है। अक्सर सरकारी अस्पतालों में पारंपरिक सफाई व्यवस्था के कारण संक्रमण (हॉस्पिटल एक्वायर्ड इन्फेक्शन) फैलने का खतरा बना रहता है, जो मरीजों की जान पर भारी पड़ता है। नई व्यवस्था के तहत आधुनिक वैक्यूम क्लीनर्स, स्क्रबर ड्रायर्स और हाई-प्रेशर जेट मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि ओपीडी से लेकर जनरल वार्ड्स तक बैक्टीरिया मुक्त माहौल मिल सके।

मरीजों और डॉक्टरों दोनों के लिए बदलेगा अस्पतालों का माहौल

डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से न सिर्फ मरीजों को एक सुखद और तनावमुक्त माहौल मिलेगा, बल्कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को भी काम करने के लिए सुरक्षित वातावरण नसीब होगा। पीपीपी मोड के आने से सफाई कर्मचारियों की जवाबदेही तय होगी और औचक निरीक्षण के जरिए काम की गुणवत्ता की जांच की जाएगी। अगर यह पायलट प्रोजेक्ट इन तीनों जिलों में कामयाब रहता है, तो आने वाले दिनों में इसे राज्य के बाकी 19 जिलों के नागरिक अस्पतालों में भी लागू किया जा सकता है।

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