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Haryana Government Schools: सरकारी स्कूलों में दिखेगा सुधार, बुनियादी सुविधाओं के लिए शिक्षा विभाग ने खोला खजाना

AAmandeep Singh
सरकारी स्कूलों में दिखेगा सुधार, बुनियादी सुविधाओं के लिए शिक्षा विभाग ने खोला खजाना
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हरियाणा। हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले नौनिहालों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश सरकार ने स्कूलों की खस्ताहाल व्यवस्था को सुधारने के लिए कड़ा रुख अख्तियार किया है। अक्सर बजट और मंजूरियों के फेर में अटकी रहने वाली छोटी-मोटी मरम्मत अब स्थानीय स्तर पर ही सुलझाई जाएगी। शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि पेयजल, शौचालय की मरम्मत और स्कूल परिसर की सफाई जैसे कार्यों के लिए अब मुख्यालय के चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी। स्कूल प्रबंधन को सीधे तौर पर इन कमियों को दूर करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

समीक्षा बैठक में खुली थी अव्यवस्था की पोल

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दरअसल, बीते 19 फरवरी को हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे। विभाग को जानकारी मिली कि प्रदेश के कई स्कूलों में न तो पीने के साफ पानी की व्यवस्था है और न ही शौचालय इस्तेमाल के लायक बचे हैं। कहीं स्कूल की दीवारें टूटी पड़ी हैं, तो कहीं कूड़े के ढेर और जलभराव ने छात्रों का जीना मुहाल कर रखा है। इसी गंभीरता को देखते हुए विभाग ने सभी जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारियों और स्कूल मुखियाओं को स्पष्ट हिदायत दी है कि वे तुरंत इन समस्याओं को चिन्हित करें और काम शुरू करवाएं।

बजट की नहीं होगी कमी, ‘चाइल्ड वेलफेयर फंड’ का होगा इस्तेमाल

काम में तेजी लाने के लिए सरकार ने वित्तीय शक्तियों का विकेंद्रीकरण किया है। अब स्कूल प्रमुख अपनी जरूरतों के हिसाब से ‘चाइल्ड वेलफेयर फंड’ (CWF) से पैसा खर्च कर सकेंगे। विभाग का अनुमान है कि छोटे स्तर के इन सुधारों पर प्रति स्कूल लगभग 1 लाख रुपये का खर्च आएगा। यदि किसी स्कूल के पास फंड कम पड़ता है, तो वह जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से तुरंत मुख्यालय को प्रस्ताव भेज सकता है। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए साप्ताहिक रिपोर्टिंग सिस्टम लागू किया गया है, ताकि कोई भी अधिकारी काम में कोताही न बरत सके।

पढ़ाई के लिए बनेगा बेहतर माहौल

शिक्षा विभाग के इस कदम का सीधा मकसद सरकारी स्कूलों के प्रति जनता का भरोसा बहाल करना है। अधिकारियों का मानना है कि जब तक स्कूल का वातावरण स्वच्छ और सुरक्षित नहीं होगा, तब तक बच्चों की पढ़ाई पर सकारात्मक प्रभाव पड़ना मुश्किल है। साफ पेयजल और स्वच्छ शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं मिलने से न केवल बीमारियां कम होंगी, बल्कि स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति भी बढ़ेगी। सरकार की कोशिश है कि नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले अधिकांश स्कूलों का कायाकल्प पूरा कर लिया जाए।

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