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Haryana School Robotics: मिशन हाईटेक एजुकेशन: हरियाणा के 391 स्कूलों में शुरू होगी रोबोटिक्स और एस्ट्रोनॉमी लैब।

GGaganpreet Kaur
मिशन हाईटेक एजुकेशन: हरियाणा के 391 स्कूलों में शुरू होगी रोबोटिक्स और एस्ट्रोनॉमी लैब।
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यमुनानगर। हरियाणा में सरकारी शिक्षा का ढांचा अब पारंपरिक किताबों से निकलकर भविष्य की तकनीकों की ओर कदम बढ़ा रहा है। प्रदेश सरकार ने छात्रों को ‘डिजिटल युग’ की चुनौतियों के लिए तैयार करने का एक महत्वाकांक्षी खाका तैयार किया है। इसके तहत यमुनानगर समेत प्रदेश के 391 स्कूलों में स्थापित अटल टिंकरिंग लैब और एस्ट्रोनॉमी लैब को अब पूरी क्षमता के साथ सक्रिय किया जाएगा। खास बात यह है कि अब छात्र केवल थ्योरी नहीं पढ़ेंगे, बल्कि खुद रोबोट असेंबल करेंगे, कोडिंग के जरिए मशीनों को निर्देश देंगे और ड्रोन की उड़ान के पीछे की फिजिक्स को समझेंगे।

पहले गुरुजी बनेंगे ‘स्मार्ट’: चार चरणों में होगा प्रशिक्षण

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छात्रों को हाईटेक बनाने से पहले शिक्षा विभाग शिक्षकों को इन नई तकनीकों में माहिर करने जा रहा है। हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद ने इसके लिए मई और जून के महीने में जिलेवार चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम तय किया है। 12 मई से शुरू होने वाला यह सिलसिला 30 मई तक चलेगा। इसमें विज्ञान और कंप्यूटर शिक्षकों को डिजाइन थिंकिंग, बेसिक इलेक्ट्रॉनिक्स और सोल्डरिंग जैसी जमीनी बारीकियों से लेकर मशीन लर्निंग जैसी जटिल प्रक्रियाओं का पाठ पढ़ाया जाएगा। इस ट्रेनिंग के जरिए शिक्षक यह सीखेंगे कि कैसे छोटे-छोटे सर्किट बनाकर वे बच्चों को प्रयोगात्मक विज्ञान समझा सकते हैं।

कोडिंग से लेकर अंतरिक्ष विज्ञान तक: ऐसा होगा ट्रेनिंग का शेड्यूल

प्रशिक्षण कार्यक्रम को बेहद वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया गया है। दूसरे दिन का पूरा फोकस कोडिंग और मशीन लर्निंग पर रहेगा, जहां शिक्षक ‘इमेज रिकग्निशन’ और ‘स्पीच बेस्ड एआई मॉडल’ बनाना सीखेंगे। तीसरे दिन का सत्र रोबोटिक्स और 3डी प्रिंटिंग के नाम रहेगा, जिसमें ड्रोन उड़ाने और उसके तकनीकी संचालन का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाएगा। वहीं, आखिरी दिन शिक्षक दूरबीन और खगोलीय उपकरणों के माध्यम से अंतरिक्ष की गहराइयों को समझने का हुनर सीखेंगे। ट्रेनिंग के अंत में शिक्षकों का ‘पोस्ट असेसमेंट टेस्ट’ भी लिया जाएगा ताकि उनकी दक्षता का आकलन हो सके।

भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो रही नई पौध

जिला विज्ञान विशेषज्ञ विशाल सिंघल ने बताया कि इस पहल का सीधा उद्देश्य सरकारी स्कूलों के बच्चों में नवाचारी सोच और वैज्ञानिक कौशल विकसित करना है। हर चयनित स्कूल से दो शिक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य की गई है। जब शिक्षक खुद इन तकनीकों में पारंगत होकर लौटेंगे, तो वे स्कूलों में छात्रों को भविष्य के प्रोजेक्ट्स पर काम करने के लिए प्रेरित कर सकेंगे। इससे न केवल छात्रों की तकनीकी समझ बढ़ेगी, बल्कि वे ग्लोबल कॉम्पिटिशन में भी मजबूती से खड़े हो पाएंगे।

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