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Mid Day Meal Budget: हरियाणा के सरकारी स्कूलों में अब और भी पौष्टिक होगा मिड-डे मील, सरकार ने मंजूर किए 747 करोड़ रुपये

AAmandeep Singh
हरियाणा के सरकारी स्कूलों में अब और भी पौष्टिक होगा मिड-डे मील, सरकार ने मंजूर किए 747 करोड़ रुपये
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हरियाणा। हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने शुक्रवार को राज्य स्तरीय कार्यान्वयन एवं निगरानी समिति की बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का मुख्य एजेंडा आगामी वित्त वर्ष के लिए बजट का प्रावधान करना और वर्तमान में चल रही मिड-डे मील व्यवस्था की खामियों को दूर करना था। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि बच्चों को दिया जाने वाला भोजन न केवल स्वच्छ होना चाहिए, बल्कि उसमें निर्धारित कैलोरी और प्रोटीन की मात्रा का भी पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।

केंद्र और राज्य का साझा प्रयास

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मंजूर किए गए 747 करोड़ रुपये के बजट में दिलचस्प बात यह है कि हरियाणा सरकार ने अपने हिस्से (State Share) में बड़ी बढ़ोतरी की है। कुल बजट में केंद्र सरकार 222 करोड़ रुपये की मदद देगी, जबकि राज्य सरकार 525 करोड़ रुपये का योगदान देगी। यह अनुपात दर्शाता है कि प्रदेश सरकार केंद्र की योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए वित्तीय संसाधनों की कमी नहीं होने देना चाहती।

14.8 लाख बच्चों तक पहुंचेगी योजना की आंच

बैठक के दौरान प्राथमिक शिक्षा निदेशक मनिता मलिक ने आगामी वर्ष की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान प्रदेश के लगभग 14 लाख 80 हजार बच्चों को इस योजना के तहत कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें प्राथमिक पाठशालाओं के साथ-साथ अब ‘बालवाटिका’ (प्री-स्कूल) के नन्हे बच्चों को भी शामिल किया गया है, ताकि उनके शुरुआती विकास के वर्षों में उन्हें बेहतर पोषण मिल सके।

गुणवत्ता और निगरानी पर रहेगा जोर

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भोजन की गुणवत्ता को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए। स्कूलों में किचन शेड की मरम्मत, बर्तनों की सफाई और रसोइयों के मानदेय जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई। सरकार का मानना है कि यदि बच्चों को स्कूल में ही पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन मिलेगा, तो न केवल उनकी सेहत सुधरेगी बल्कि स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति (Retention) भी बढ़ेगी।

विशेषज्ञों की राय: ड्रॉप-आउट दर कम करने में मिलेगी मदद

शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम पोषण योजना के लिए बजट में यह इजाफा हरियाणा के ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में मील का पत्थर साबित होगा। अक्सर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे पोषण की कमी के कारण पढ़ाई छोड़ देते हैं, ऐसे में सरकार का यह ‘न्यूट्रिशन इनवेस्टमेंट’ भविष्य की पीढ़ी को मजबूत बनाने का काम करेगा।

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