हरियाणा। हरियाणा में प्रशासनिक तंत्र को और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने के इरादे से सूबे की सरकार ने तुरंत प्रभाव से दो वरिष्ठ नौकरशाहों के कार्यभार में तब्दीली की है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी के दफ्तर से जारी इन आदेशों में एक आईएएस (IAS) और एक आईएफओएस (IFoS) अधिकारी का नाम शामिल है। शासन द्वारा किए गए इस नीतिगत बदलाव का मुख्य उद्देश्य कौशल विकास और उच्च शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों की प्रशासनिक व्यवस्था को ज्यादा व्यावहारिक और सुव्यवस्थित रूप देना है।
सत्येंद्र दुहान को नई जिम्मेदारी, कौशल विकास को गति देने की तैयारी
सरकारी आदेश के मुताबिक, साल 2018 बैच के आईएएस अधिकारी सत्येंद्र दुहान के कंधों पर अब जिम्मेदारी का बोझ और बढ़ा दिया गया है। दुहान इस समय कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के निदेशक और सरकार के अतिरिक्त सचिव के तौर पर सेवाएं दे रहे हैं। अब उनकी कार्यकुशलता को देखते हुए उन्हें अपने मौजूदा दायित्वों के साथ-साथ ‘हरियाणा कौशल विकास मिशन’ के मिशन निदेशक (Mission Director) पद का अतिरिक्त प्रभार भी सौंप दिया गया है। माना जा रहा है कि युवाओं के रोजगार और स्किलिंग से जुड़े इस बड़े प्रोजेक्ट को रफ्तार देने के लिए यह फैसला लिया गया है।
एस. नारायणन को एक प्रभार से राहत, उच्च शिक्षा पर रहेगा मुख्य फोकस
वहीं दूसरी तरफ, वर्ष 1997 बैच के वरिष्ठ आईएफओएस अधिकारी एस. नारायणन के कार्यभार को थोड़ा हल्का किया गया है। नारायणन वर्तमान में हरियाणा के उच्च शिक्षा महानिदेशक (Director General), उच्च शिक्षा विभाग के सचिव और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य सचिव जैसी तीन बड़ी और संवेदनशील भूमिकाएं एक साथ निभा रहे थे। महामहिम राज्यपाल की मंजूरी के बाद जारी हुए नए निर्देशों के तहत अब एस. नारायणन को ‘राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण’ के सदस्य सचिव पद की अतिरिक्त जिम्मेदारी से तत्काल प्रभाव से मुक्त कर दिया गया है। हालांकि, उच्च शिक्षा विभाग के महानिदेशक और सचिव के रूप में उनके बाकी पद पहले की तरह बरकरार रहेंगे, जिससे वे उच्च शिक्षा से जुड़े बड़े फैसलों पर अपना ध्यान पूरी तरह केंद्रित कर सकेंगे।
प्रशासनिक सुगमता के लिए लिया गया फैसला
चंडीगढ़ के गलियारों में इस बदलाव को प्रशासनिक संतुलन साधने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि विभागीय कामकाज की गति को बढ़ाने और फाइलों के निपटारे में होने वाली देरी को कम करने के लिए समय-समय पर ऐसे कदम उठाने जरूरी होते हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि इस फेरबदल के बाद दोनों ही अधिकारियों के विभागों में कार्यपालिका अधिक प्रभावी तरीके से जमीन पर दिखाई देगी।

