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Haryana School Admission : प्राइवेट स्कूलों को टक्कर देंगे हरियाणा के सरकारी स्कूल, शुरू हुआ डोर-टू-डोर एडमिशन कैंपेन

AAmandeep Singh
प्राइवेट स्कूलों को टक्कर देंगे हरियाणा के सरकारी स्कूल, शुरू हुआ डोर-टू-डोर एडमिशन कैंपेन
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हरियाणा।  हरियाणा की खट्टर-सैनी सरकार के विजन को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा विभाग ने राज्य के सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने की तैयारी कर ली है। प्रदेश को ‘जीरो ड्राप आउट’ स्टेट बनाने के संकल्प के साथ अब सरकारी शिक्षक केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे गली-मोहल्लों में जाकर बच्चों का दाखिला सुनिश्चित करेंगे। 23 मार्च से शुरू हुआ यह अभियान 20 अप्रैल तक पूरे जोर-शोर से चलेगा। विभाग का स्पष्ट मानना है कि जब तक हर बच्चा स्कूल की दहलीज तक नहीं पहुंचता, तब तक शत-प्रतिशत साक्षरता का सपना अधूरा है।

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हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद ने इस बाबत प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और स्कूल मुखियाओं को कड़े निर्देश जारी किए हैं। नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए तय किए गए इस लक्ष्य के तहत 3 से 18 वर्ष की आयु के हर किशोर और बच्चे का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। विशेष रूप से उन बच्चों पर फोकस रहेगा जो बीच में ही पढ़ाई छोड़ चुके हैं। इस मुहिम में स्कूल प्रबंधन समितियां (SMC) और ग्राम पंचायतें भी अहम भूमिका निभाएंगी, ताकि सामाजिक और आर्थिक कारणों से पिछड़ रहे परिवारों को जागरूक किया जा सके।

शिक्षकों को मिली फील्ड ड्यूटी: उदासीन अभिभावकों की होगी काउंसलिंग

इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत इसका ‘डोर-टू-डोर’ मॉडल है। शिक्षकों को हिदायत दी गई है कि वे अपने क्षेत्र के ऐसे परिवारों की सूची तैयार करें जो शिक्षा के प्रति उदासीन हैं। शिक्षक इन घरों में जाकर अभिभावकों को मुफ्त वर्दी, मिड-डे मील और किताबों जैसी सरकारी योजनाओं की जानकारी देंगे। विभाग का लक्ष्य केवल प्राथमिक शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उच्चतर शिक्षा (Higher Education) में भी नामांकन के मौजूदा 34 प्रतिशत के आंकड़े को बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक ले जाने की चुनौती शिक्षकों के कंधों पर है।

पंचायतों और कम्युनिटी का बढ़ेगा दखल

सिर्फ सरकारी आदेशों से नहीं, बल्कि जन-भागीदारी से इस उत्सव को सफल बनाने की योजना है। स्कूलों में ‘प्रवेश उत्सव’ के दौरान विशेष कार्यक्रमों का आयोजन होगा, जिसमें नए आने वाले बच्चों का स्वागत तिलक लगाकर और मिठाई बांटकर किया जाएगा। ग्रामीण इलाकों में मुनादी और रैलियों के जरिए शिक्षा के महत्व को बताया जा रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस बार का फोकस उन झुग्गी-झोपड़ियों और खानाबदोश बस्तियों पर अधिक है, जहां से सबसे ज्यादा बच्चे स्कूल से बाहर रह जाते हैं।

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