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Haryana School Admission Crisis: हरियाणा शिक्षा संकट: 31 हजार छात्रों का भविष्य अधर में, SLC के बावजूद नहीं मिल रहा दाखिला

AAmandeep Singh
हरियाणा शिक्षा संकट: 31 हजार छात्रों का भविष्य अधर में, SLC के बावजूद नहीं मिल रहा दाखिला
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हरियाणा। हरियाणा में ‘पढ़ेगा इंडिया-बढ़ेगा इंडिया’ के नारों के बीच एक ऐसी कड़वी हकीकत सामने आई है, जिसने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 30 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लगा है। इन बच्चों ने बेहतर शिक्षा या घर बदलने जैसे कारणों से अपने पुराने स्कूलों से नाम तो कटवा लिया, लेकिन जब वे नए शिक्षण संस्थानों की दहलीज पर पहुंचे, तो वहां उन्हें प्रवेश देने से साफ इनकार कर दिया गया। विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक, इस वक्त प्रदेश के 30,919 छात्र ऐसे हैं जो तकनीकी रूप से किसी भी स्कूल का हिस्सा नहीं हैं।

क्यों बंद हुए स्कूलों के दरवाजे?

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इस शैक्षिक संकट के पीछे की वजहें काफी चौंकाने वाली हैं। जांच में सामने आया है कि कई सरकारी स्कूलों और खासकर प्रदेश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘संस्कृति मॉडल स्कूलों’ में क्षमता से अधिक दाखिले हो चुके हैं। सीटें फुल होने का हवाला देकर प्रधानाचार्य नए छात्रों को लौटा रहे हैं। इसके अलावा, कई मामलों में छात्रों के पुराने शैक्षणिक प्रदर्शन (Academic Performance) को आधार बनाकर उन्हें दाखिला देने से मना किया जा रहा है। कहीं विषय संयोजन (Subject Combination) की कमी आड़े आ रही है, तो कहीं स्कूल प्रबंधन बुनियादी ढांचे के अभाव का रोना रो रहा है।

जिलावार स्थिति: गुरुग्राम और करनाल में सबसे बुरा हाल

अगर जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें, तो साइबर सिटी गुरुग्राम में स्थिति सबसे भयावह है, जहां 3,162 बच्चों को दाखिला नसीब नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री का पूर्व निर्वाचन क्षेत्र करनाल भी इस सूची में पीछे नहीं है, जहां 3,045 छात्र प्रवेश के लिए दर-दर भटक रहे हैं।

हैरानी की बात यह है कि अंबाला, भिवानी और फतेहाबाद जैसे जिलों में भी यह संख्या 1300 के पार है। कमोबेश यही स्थिति रोहतक, सोनीपत और यमुनानगर की भी है।

क्या होगा इन 30 हजार बच्चों का भविष्य?

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते विभाग ने दखल नहीं दिया, तो ये बच्चे ड्रॉप-आउट की श्रेणी में आ जाएंगे। एक तरफ सरकार निजी स्कूलों की तर्ज पर सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर हजारों बच्चे बुनियादी शिक्षा के अधिकार से ही वंचित हो रहे हैं। फिलहाल, अभिभावकों में भारी रोष है और वे शिक्षा विभाग से विशेष दाखिला अभियान चलाने की मांग कर रहे हैं ताकि उनके बच्चों का कीमती साल बर्बाद होने से बच सके।

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