हरियाणा। सरकारी स्कूलों में अक्सर एक छोटा सा पंखा ठीक कराने या पानी की पाइप लाइन की लीकेज रुकवाने के लिए महीनों तक कागजी खानापूर्ति करनी पड़ती थी। लेकिन अब हरियाणा का शिक्षा विभाग इस ‘सुस्त’ सिस्टम को बदलने जा रहा है। विभाग ने नई गाइडलाइन जारी कर स्कूल के प्रिंसिपलों और हेडमास्टरों को ‘पावर’ दी है कि वे अपने स्तर पर जरूरी मरम्मत कार्य करवाएं। इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि मामूली तकनीकी खामियों के कारण अब छात्रों की पढ़ाई बाधित नहीं होगी।
ये काम अब होंगे चुटकियों में: क्या-क्या बदला?
अब तक की व्यवस्था में स्कूल मुखियाओं के हाथ बंधे हुए थे, लेकिन नई योजना के तहत वे निम्नलिखित कार्य तुरंत करवा सकेंगे:
बिजली और पानी: टूटे हुए स्विच बदलना, पंखों की मोटर बंधवाना, वायरिंग ठीक करना और नल या टॉयलेट की पाइप लीकेज की मरम्मत।
भवन का रखरखाव: क्लासरूम के दरवाजों-खिड़कियों के हैंडल, टूटे हुए कांच बदलना, दीवारों की मामूली दरारें भरना या छोटी-मोटी सफेदी (White Wash) करवाना।
स्वच्छता और खेल: शौचालयों की छोटी मरम्मत, स्कूल के बगीचे का सौंदर्यीकरण और खेल के मैदान की झाड़ियां कटवाकर सफाई सुनिश्चित करना।
पारदर्शिता की ‘चेकलिस्ट’: अधिकारों के साथ जिम्मेदारी भी
सरकार ने वित्तीय अधिकार तो दिए हैं, लेकिन इसके साथ ही जवाबदेही की शर्तें भी सख्त रखी हैं। भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म करने के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि कोई भी खर्च करने से पहले स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC) से लिखित प्रस्ताव पास कराना होगा। इसके अलावा, किए गए हर छोटे-बड़े खर्च का पक्का बिल रखना होगा, जिसका भविष्य में किसी भी समय ऑडिट किया जा सकता है। सरकार ने इसके लिए एक निश्चित बजट सीमा (Limit) भी तय की है, जिसके भीतर ही स्थानीय स्तर पर भुगतान किया जा सकेगा।
“लालफीताशाही खत्म, शिक्षा पर फोकस”: शिक्षा मंत्री का बयान
हरियाणा के शिक्षा मंत्री के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य ‘रेड टेपिस्म’ यानी लालफीताशाही को जड़ से खत्म करना है। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि हमारे प्रिंसिपल केवल कागजी कार्यवाही में न उलझे रहें, बल्कि उनका पूरा ध्यान शिक्षा की गुणवत्ता पर हो। जब स्कूल का बुनियादी ढांचा दुरुस्त होगा, तभी छात्र एक सुरक्षित और बेहतर माहौल में शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे।” इस नई पहल से उम्मीद जगी है कि अब प्रदेश के हजारों सरकारी स्कूल निजी स्कूलों की तर्ज पर ‘अप-टू-डेट’ नजर आएंगे।

