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Haryana Health Department: हरियाणा में डॉक्टरों पर गिरी गाज: PC-PNDT एक्ट में ढिलाई बरतने पर डॉ. टीना आनंद समेत 4 सस्पेंड

GGaganpreet Kaur
हरियाणा में डॉक्टरों पर गिरी गाज: PC-PNDT एक्ट में ढिलाई बरतने पर डॉ. टीना आनंद समेत 4 सस्पेंड
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हरियाणा में कन्या भ्रूण हत्या को रोकने और लिंगानुपात में सुधार के दावों के बीच स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ा और कड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। पीसी-पीएनडीटी एक्ट के तहत होने वाली कार्रवाई में ढीली मॉनिटरिंग और लापरवाही को लेकर सरकार ने चार डॉक्टरों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) सुमिता मिश्रा की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, निलंबित किए गए अधिकारियों में तीन सीनियर मेडिकल अफसर (SMO) डॉ. टीना आनंद, डॉ. विजय परमार, डॉ. सतपाल और एक मेडिकल अफसर (MO) डॉ. प्रभा शामिल हैं।

कागजों में सिमटा अभियान, फील्ड से गायब रही मॉनिटरिंग

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विभागीय सूत्रों के मुताबिक, इन चारों डॉक्टरों के पास अपने-अपने क्षेत्रों में लिंगानुपात की निगरानी और अवैध लिंग जांच रैकेट के खिलाफ शिकंजा कसने की अहम जिम्मेदारी थी। जांच में सामने आया कि इन अधिकारियों ने कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए बनाए गए पूरे तंत्र को सख्ती से लागू करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। पीसी-पीएनडीटी एक्ट के तहत होने वाली रूटीन चेकिंग, कानूनी कार्रवाई और केसों के फॉलोअप में गंभीर कोताही बरती गई। इसके अलावा फील्ड में काम करने वाली टीमों के साथ भी इन अधिकारियों का कोई तालमेल नहीं था, जिसका सीधा असर लिंगानुपात के आंकड़ों पर पड़ रहा था।

मुख्यमंत्री की प्राथमिकता पर ढिलाई पड़ी भारी, सरकार का सख्त संदेश

हरियाणा कभी देश में सबसे खराब लिंगानुपात के दाग से जूझ रहा था, लेकिन ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान के बाद जमीनी स्तर पर स्थितियों में काफी सुधार दर्ज किया गया था। सरकार इस सुधार की रफ्तार को किसी भी कीमत पर धीमा नहीं पड़ने देना चाहती। एसीएस सुमिता मिश्रा की इस कार्रवाई से मुख्यमंत्री कार्यालय ने पूरे सूबे के स्वास्थ्य महकमे को एक स्पष्ट और कड़ा संदेश दे दिया है कि इस राष्ट्रीय अभियान में किसी भी स्तर पर सुस्ती मंजूर नहीं की जाएगी। अफसरों को फील्ड में उतरकर जवाबदेही तय करनी ही होगी।

सस्पेंशन के साथ शुरू हुई विभागीय जांच, बढ़ सकती हैं मुश्किलें

स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों का कहना है कि यह निलंबन तो सिर्फ शुरुआत है। निलंबन की इस अवधि के दौरान इन चारों डॉक्टरों के खिलाफ एक उच्च स्तरीय विभागीय जांच चलाई जाएगी। जांच टीम इस बात की तह तक जाएगी कि क्या यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही का मामला था या फिर इसके पीछे कोई और सांठगांठ थी। इस जांच की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर ही इन अधिकारियों के खिलाफ आगे की बड़ी अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई तय होगी। इस कार्रवाई के बाद से राज्यभर के पीसी-पीएनडीटी नोडल दफ्तरों में मुस्तैदी अचानक बढ़ गई है।

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