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High Court Compensation News: महेंद्रगढ़ की अंशु को मिलेगा ₹1 करोड़ का मुआवजा, हाईकोर्ट ने बिजली निगम को लगाई कड़ी फटकार

AAmandeep Singh
महेंद्रगढ़ की अंशु को मिलेगा ₹1 करोड़ का मुआवजा, हाईकोर्ट ने बिजली निगम को लगाई कड़ी फटकार
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हरियाणा। न्याय की चौखट पर भले ही देर हुई, लेकिन महेंद्रगढ़ की बेटी अंशु के लिए वह अंधेर साबित नहीं हुई। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बिजली विभाग की लापरवाही की कीमत तय करते हुए पीड़ित परिवार के पक्ष में करीब एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मुहर लगा दी है। जस्टिस की बेंच ने साफ शब्दों में कहा कि हाईटेंशन लाइनों का रखरखाव और सुरक्षा सुनिश्चित करना पूरी तरह बिजली निगम की जिम्मेदारी है। यह फैसला उन तमाम परिवारों के लिए एक मिसाल है जो विभागों की सुस्ती के कारण अपनों को खो देते हैं या ताउम्र की अपाहिजता झेलने पर मजबूर होते हैं।

छत पर खेल रही थी अंशु, पास से गुजरती मौत ने पकड़ा हाथ

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हादसे की कहानी साल 2022 की है, जब गांव नावदी निवासी राजकुमार की बेटी अंशु अपने घर की छत पर खेल रही थी। घर की दीवार से सटकर गुजर रही 11 हजार वोल्टेज की हाईटेंशन लाइन ने अचानक उसे अपनी ओर खींच लिया। करंट इतना जोरदार था कि मासूम का दाहिना हाथ पूरी तरह झुलस गया और डॉक्टरों को जान बचाने के लिए कंधे से हाथ काटना पड़ा। 92 प्रतिशत दिव्यांगता ने अंशु का बचपन छीन लिया और उसकी पढ़ाई-लिखाई पर भी ब्रेक लगा दिया। परिवार ने जब बिजली निगम से गुहार लगाई, तो पहले उन्हें महज ₹18.92 लाख थमाकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की गई, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

बिजली निगम की दलीलें फेल, कोर्ट ने गिनाईं कमियां

सुनवाई के दौरान बिजली निगम ने खुद को बचाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन हाईकोर्ट ने हर पहलू पर सख्ती दिखाई। अदालत ने माना कि हाईटेंशन लाइन का रिहायशी मकानों के इतने करीब होना और सुरक्षा मानकों (Safety Guards) का न होना विभाग की सीधी गलती है। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जो एजेंसियां खतरनाक सेवाएं संचालित करती हैं, उनकी जवाबदेही भी उतनी ही बड़ी होनी चाहिए। अंशु के मामले में कोर्ट ने उसकी भविष्य की संभावित आय, कृत्रिम अंग (Artificial Limb) का खर्च और मानसिक पीड़ा को आधार बनाकर मुआवजे की गणना की।

कैसे खर्च होगी मुआवजे की राशि?

अदालत ने केवल मुआवजा ही नहीं दिया, बल्कि बच्ची के भविष्य के लिए एक ‘फाइनेंशियल प्लान’ भी तय कर दिया है। आदेश के मुताबिक, ₹99.93 लाख की इस राशि पर 7.5% ब्याज के साथ 3 महीने के भीतर भुगतान करना होगा। इस कुल रकम का 90 प्रतिशत हिस्सा अंशु के नाम पर एफडी (FD) में जमा रहेगा। सबसे अहम बात यह है कि इस राशि के ब्याज से हर महीने ₹30,000 अंशु की पढ़ाई और मेडिकल जरूरतों के लिए परिवार को मिलते रहेंगे। इस फैसले से राजकुमार के परिवार की आंखों में इंसाफ की चमक और अंशु के भविष्य को लेकर एक नई उम्मीद जगी है।

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