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Sem Samasya Haryana; हरियाणा किसान खुशखबरी: 1701 करोड़ से सुधरेगी हिसार-घग्गर ड्रेन, सेम की समस्या का होगा खात्मा

AAmandeep Singh
हरियाणा किसान खुशखबरी: 1701 करोड़ से सुधरेगी हिसार-घग्गर ड्रेन, सेम की समस्या का होगा खात्मा
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हरियाणा। हरियाणा के ‘खारे पानी’ और ‘सेम’ की दोहरी मार झेल रहे पश्चिमी जिलों के किसानों के लिए सरकार ने उम्मीदों का नया पिटारा खोल दिया है। हिसार, सिरसा और फतेहाबाद जिलों में खेती की सबसे बड़ी दुश्मन बन चुकी ‘सेम’ (Waterlogging) की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने मास्टर प्लान तैयार किया है। हिसार-घग्गर मल्टीपर्पज ड्रेन, जो पिछले लंबे समय से जर्जर हालत में थी, अब 1701 करोड़ रुपये की लागत से नए अवतार में नजर आएगी। इस ड्रेन की री-मॉडलिंग से न केवल खेतों का पानी निकलेगा, बल्कि उन जमीनों पर भी फिर से हल चल सकेंगे जो दशकों से बंजर पड़ी थीं।

चोपटा क्षेत्र का ‘नासूर’ बनेगी गुजरे जमाने की बात

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सिरसा जिले का नाथूसरी चोपटा क्षेत्र सेम की मार का सबसे बड़ा गवाह रहा है। यहाँ के दर्जनों गांवों में हालात इतने बदतर हैं कि 20 हजार एकड़ से ज्यादा भूमि दलदल में तब्दील हो चुकी है। किसानों का दर्द केवल फसलों तक सीमित नहीं था; सेम के कारण घरों की दीवारें गिर रही थीं और उपजाऊ जमीनें आंखों के सामने सफेद रेह (नमक) की चादर में लिपटी नजर आती थीं। इस नई परियोजना के तहत चोपटा क्षेत्र की इस बदहाली को दूर करने के लिए विशेष ड्रेनेज नेटवर्क बिछाया जा रहा है, जिसका सीधा जुड़ाव मुख्य ड्रेन से होगा।

सिंचाई विभाग ने संभाली कमान, शुरू हुआ ग्राउंड वर्क

सिंचाई विभाग ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर काम की रफ्तार तेज कर दी है। विभाग के एक्सईएन (XEN) संदीप माथुर के अनुसार, इस ड्रेन को आधुनिक तरीके से डिजाइन किया गया है ताकि इसकी जल निकासी क्षमता को कई गुना बढ़ाया जा सके। फिलहाल चोपटा क्षेत्र के कुछ गांवों में शुरुआती काम शुरू भी हो चुका है। सरकार का लक्ष्य है कि इस ड्रेन की री-मॉडलिंग के बाद जलस्तर को नियंत्रित रखा जाए, जिससे भविष्य में दोबारा सेम की स्थिति पैदा न हो। यह प्रोजेक्ट उन किसानों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है जो अपनी जमीन को खंडहर और दलदल बनते देख हार मान चुके थे।

खेती के साथ घरों को भी मिलेगी सुरक्षा

सेम केवल फसलें ही नहीं उजाड़ती, बल्कि यह ग्रामीण बुनियादी ढांचे को भी खोखला कर देती है। हिसार-घग्गर ड्रेन के दुरुस्त होने से इन जिलों के गांवों में सीलन और नींव धंसने की समस्या पर भी लगाम लगेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि 1701 करोड़ का यह निवेश आने वाले सालों में कृषि उत्पादन के जरिए प्रदेश की जीडीपी में कई गुना वापसी करेगा। मुख्यमंत्री कार्यालय से हरी झंडी मिलने के बाद अब इस प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग सीधे चंडीगढ़ से की जा रही है, ताकि समय सीमा के भीतर किसानों को इसका लाभ मिल सके।

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