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Haryana Job Alert: हरियाणा में नौकरी का इंतजार बना सजा: 1699 चयनित युवा 9 महीने से जॉइनिंग के लिए दर-दर भटक रहे

AAmandeep Singh
हरियाणा में नौकरी का इंतजार बना सजा: 1699 चयनित युवा 9 महीने से जॉइनिंग के लिए दर-दर भटक रहे
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हरियाणा। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) की कार्यप्रणाली और कानूनी दांव-पेंचों ने हजारों युवाओं की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। मामला CET Group-C की भर्तियों से जुड़ा है, जिसमें क्लर्क, पटवारी, ग्राम सचिव और JE जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। विडंबना देखिए कि 14 जून 2025 को आए संशोधित परिणाम (Revised Result) में अपनी काबिलियत साबित करने वाले 1699 युवा आज दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। इनमें कॉमर्स ग्रुप-6 के वे अभ्यर्थी भी शामिल हैं, जिनका परिणाम पहली बार जारी हुआ था, लेकिन खुशी मिलने से पहले ही कानूनी ग्रहण लग गया।

तारीख पर तारीख: अदालत के गलियारों में गुम होता भविष्य

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इस पूरी उलझन की जड़ में वे 781 अभ्यर्थी हैं, जो संशोधित रिजल्ट के कारण चयन सूची से बाहर हो गए थे। इन अभ्यर्थियों ने डिवीजन बेंच में चुनौती दी, जिसके बाद नियुक्तियों पर स्टे लगा दिया गया। आज 9 महीने बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। कोर्ट रूम में हर सुनवाई के बाद नई तारीख तो मिल जाती है, पर नियुक्ति पत्र का इंतजार खत्म नहीं होता। चयनित युवाओं का कहना है कि वे न्यायालय के आदेश की सीधी अनुपालना में मेरिट के आधार पर आए हैं, फिर भी उन्हें सजा मिल रही है।

आर्थिक तंगी और मानसिक अवसाद का दोहरा वार

लंबे समय से जॉइनिंग का इंतजार कर रहे इन 1699 परिवारों में अब हताशा घर करने लगी है। कई अभ्यर्थी ऐसे हैं जिन्होंने अपनी निजी नौकरियां छोड़ दी थीं या कर्ज लेकर परीक्षाओं की तैयारी की थी। अब न उनके पास आय का साधन है और न ही भविष्य की कोई निश्चितता। एक ओर जहां संशोधित रिजल्ट में बाहर हुए 781 लोग पुराने पदों पर वेतन उठा रहे हैं, वहीं नई मेरिट वाले युवा आर्थिक तंगी के कारण डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं।

समाधान की राह: अब गेंद सरकार के पाले में

चयनित अभ्यर्थियों की मांग अब सीधे मुख्यमंत्री और आयोग के अध्यक्ष से है। उनका तर्क है कि यदि सरकार चाहे तो इस गतिरोध को खत्म कर सकती है। समाधान के तौर पर या तो सरकार कोर्ट में स्टे हटवाने के लिए ठोस कानूनी पैरवी करे, या फिर बाहर हुए 781 अभ्यर्थियों को किसी वैकल्पिक पद पर समायोजित कर नए चयनितों के लिए रास्ता साफ करे। बिना किसी ठोस पैरवी के यह मामला फाइलों में दफन होकर रह जाएगा, जिसका खामियाजा प्रदेश की क्रीम कहे जाने वाले इन मेधावी युवाओं को उठाना पड़ रहा है।

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