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Kisan News Haryana: किसानों को ढैंचा और दलहन बोने पर मिलेंगे ₹1000, जानें कैसे उठाएं लाभ

AAmandeep Singh
किसानों को ढैंचा और दलहन बोने पर मिलेंगे ₹1000, जानें कैसे उठाएं लाभ
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हरियाणा। हरियाणा के खेतों की घटती उर्वरता और गिरते भूजल स्तर को सुधारने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने एक बड़ा दांव खेला है। धान की पारंपरिक रोपाई से पहले मिट्टी को पोषक तत्वों से भरपूर करने के मकसद से सरकार ने ‘हरी खाद’ और दलहनी फसलों को बढ़ावा देने की योजना पर मुहर लगा दी है। इस योजना के तहत जो किसान अपने खेतों में ढैंचा या मूंग-उड़द जैसी फसलें उगाएंगे, उन्हें प्रोत्साहन के तौर पर ₹1000 प्रति एकड़ की राशि सीधे उनके खातों में भेजी जाएगी।

मिट्टी की सेहत सुधरेगी, जेब भरेगी

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कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि धान से पहले ढैंचा जैसी हरी खाद की बिजाई मिट्टी में नाइट्रोजन और जैविक कार्बन की मात्रा को काफी हद तक बढ़ा देती है। कृषि उपनिदेशक डॉ. सुखदेव सिंह के अनुसार, “लगातार रासायनिक खादों के इस्तेमाल से मिट्टी बेजान हो रही है। अगर किसान ढैंचा या दलहन की बिजाई करते हैं, तो अगली फसल में यूरिया और डीएपी की जरूरत कम पड़ती है और पैदावार में भी इजाफा होता है।” यही वजह है कि सरकार अब किसानों को बीज से लेकर बिजाई तक के खर्च में मदद कर रही है।

रजिस्ट्रेशन से वेरिफिकेशन तक: ये है पूरी प्रक्रिया

इस योजना का फायदा उठाने के लिए किसानों को कुछ जरूरी नियमों का पालन करना होगा। सबसे पहले ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर 15 अप्रैल तक अपना पंजीकरण कराना सुनिश्चित करें। खास बात यह है कि इस बार सरकार ने प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए पोर्टल पर फसल की फोटो अपलोड करने की शर्त भी रखी है। किसान खुले बाजार से बीज खरीदकर बिजाई कर सकते हैं। इसके बाद 16 अप्रैल से 15 मई के बीच विभाग के अधिकारी मौके पर जाकर फसल का सत्यापन करेंगे और पात्र पाए जाने पर डीबीटी (DBT) के जरिए भुगतान कर दिया जाएगा।

इन फसलों को योजना में किया गया शामिल

सरकार ने इस लिस्ट में केवल ढैंचा को ही नहीं रखा है, बल्कि दलहन की कई किस्मों को शामिल किया है ताकि किसानों के पास विकल्प मौजूद रहें। योजना के दायरे में ग्रीष्मकालीन मूंग, उड़द, लोबिया, मोठ, अरहर, सोयाबीन और ग्वार जैसी फसलें आती हैं। इन फसलों की बिजाई न केवल मिट्टी को उपजाऊ बनाती है, बल्कि किसानों को दालों की बिक्री से अतिरिक्त कमाई का जरिया भी देती है। विभाग ने सभी जिलों के किसानों से अपील की है कि वे समय सीमा से पहले पंजीकरण करवाकर इस योजना का हिस्सा बनें।

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