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Haryana Protest Wage Hike : हरियाणा में वेतन वृद्धि पर मचा बवाल: आखिर क्यों 23,196 रुपये की मांग पर अड़े हैं मजदूर

AAmandeep Singh
हरियाणा में वेतन वृद्धि पर मचा बवाल: आखिर क्यों 23,196 रुपये की मांग पर अड़े हैं मजदूर
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हरियाणा। हरियाणा सरकार ने हाल ही में प्रदेश के लाखों मजदूरों को वेतन वृद्धि की सौगात दी, लेकिन यह ‘सौगात’ विवादों के घेरे में आ गई है। मानेसर, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे औद्योगिक केंद्रों में स्थिति तनावपूर्ण है। सरकार ने अकुशल श्रमिकों (Unskilled Workers) का न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 15,220.71 रुपये प्रति माह कर दिया है, लेकिन श्रमिक संगठन इसे ऊंट के मुंह में जीरे के समान बता रहे हैं। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU) के प्रदेश महासचिव जय भगवान का कहना है कि यह वृद्धि उस जमीनी हकीकत से कोसों दूर है, जिस पर पिछले साल सरकार, उद्योग जगत और मजदूर प्रतिनिधियों की साझा समिति ने सहमति जताई थी।

23,196 रुपये का वो आंकड़ा, जिस पर छिड़ी है रार

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दरअसल, सारा विवाद 23,196 रुपये की उस प्रस्तावित राशि को लेकर है, जिसकी सिफारिश राज्य न्यूनतम वेतन समिति ने 29 दिसंबर 2025 को की थी। इस आंकड़े तक पहुँचने के लिए समिति ने एक कामकाजी वयस्क के लिए कैलोरी, कपड़ों की जरूरत, मकान किराया, बच्चों की शिक्षा और चिकित्सा खर्चों का विस्तृत वैज्ञानिक आकलन किया था। मजदूरों का तर्क है कि जब सरकार की अपनी समिति ने माना है कि सम्मानजनक जीवन जीने के लिए 23 हजार से अधिक की राशि चाहिए, तो फिर 15 हजार रुपये थमाकर उनके जख्मों पर नमक क्यों छिड़का जा रहा है?

महंगाई और अंतरराष्ट्रीय संकट की दोहरी मार

मजदूरों की नाराजगी सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे हरियाणा के औद्योगिक इलाकों में रसोई गैस की भारी किल्लत हो गई है। हालत यह है कि मजदूरों को कालाबाजार से ऊंचे दामों पर सिलेंडर खरीदने पड़ रहे हैं। ‘जग मार्ग’ से बातचीत में श्रमिकों ने बताया कि ढाबों और टिफिन सेवाओं के दाम भी बढ़ गए हैं। ऐसे में 582 रुपये की दिहाड़ी पर काम करने वाले अकुशल मजदूर के लिए परिवार का पेट पालना अब किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है।

हिंसा और गिरफ्तारियों के बीच सुलगता आंदोलन

वेतन संशोधन की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शन अब उग्र रूप अख्तियार कर रहे हैं। मानेसर में हुए हालिया विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस और श्रमिकों के बीच तीखी झड़पें हुईं, जिसमें महिलाओं समेत 50 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। वहीं, पानीपत रिफाइनरी में 30 हजार संविदा कर्मियों का गुस्सा पथराव और तोड़फोड़ के रूप में फूटा। श्रमिक संगठनों का कहना है कि जब तक वेतन को दिल्ली और एनसीआर के मानकों के बराबर नहीं लाया जाता और सामाजिक सुरक्षा (PF व ESIC) सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी। नोएडा और गाजियाबाद में भी इसी तरह के हालात बने हुए हैं, जो औद्योगिक शांति के लिए खतरे की घंटी है।

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