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Haryana Municipal Elections : भाजपा का 'संगठन' vs कांग्रेस का 'सिंबल': हरियाणा के नगर निगम चुनावों में दिग्गजों की साख दांव पर

AAmandeep Singh
भाजपा का 'संगठन' vs कांग्रेस का 'सिंबल': हरियाणा के नगर निगम चुनावों में दिग्गजों की साख दांव पर
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हरियाणा।  हरियाणा में निकाय चुनावों और पंचायती राज संस्थाओं के चुनावी बिगुल ने प्रदेश के सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है। राज्य चुनाव आयुक्त देविंदर सिंह कल्याण द्वारा 13 अप्रैल को चुनाव कार्यक्रम जारी किए जाने के साथ ही नगर निकायों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि चुनाव प्रक्रिया संपन्न होने तक ड्यूटी पर तैनात किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का तबादला नहीं किया जाएगा। लेकिन इस प्रशासनिक सख्ती के बीच असली गहमागहमी राजनीतिक गलियारों में है, जहाँ भाजपा, कांग्रेस और जजपा के बीच शह और मात का खेल शुरू हो चुका है।

भाजपा की संगठनात्मक मजबूती बनाम कांग्रेस का ‘सिंबल’ कार्ड

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मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट किया है कि भाजपा का कार्यकर्ता 365 दिन चुनावी मोड में रहता है। निकाय चुनाव की कमान अब प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली के हाथों में है, जो जल्द ही विशेष कमेटियों का गठन कर उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया तेज करेंगे।

दूसरी ओर, कांग्रेस इस बार बेहद आक्रामक मूड में है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी इस बार अपने चुनाव चिह्न (सिंबल) पर मैदान में उतरेगी। 16 अप्रैल को होने वाली कांग्रेस की हाई-प्रोफाइल मीटिंग में जीत का रोडमैप तैयार किया जाएगा। झज्जर की विधायक गीता भुक्कल की अध्यक्षता में ‘घोषणा पत्र समिति’ का गठन भी कर दिया गया है, जो स्थानीय मुद्दों—जैसे सफाई, स्ट्रीट लाइट और वार्डों की समस्याओं—को आधार बनाकर अपना घोषणा पत्र तैयार करेगी।

पंचकूला वार्डबंदी विवाद: विपक्ष के हाथ लगा बड़ा मुद्दा

पंचकूला विधायक और पूर्व डिप्टी सीएम चंद्रमोहन ने वार्डबंदी के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए भाजपा को घेरा है। चंद्रमोहन का आरोप है कि भाजपा घबराकर वार्डों के गणित से छेड़छाड़ कर रही थी, जिसे कोर्ट ने रोक दिया। वहीं, जजपा सुप्रीमो दुष्यंत चौटाला ने भी कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए इसे लोकतंत्र की जीत बताया है। विपक्ष का तर्क है कि भाजपा की ‘घबराहट’ ही उसे वार्डों की संख्या घटाने-बढ़ाने पर मजबूर कर रही है।

जजपा के निशाने पर कांग्रेस और भाजपा दोनों

दुष्यंत चौटाला इस चुनाव में ‘किंगमेकर’ की भूमिका तलाश रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस के पांच विधायकों को बागी बताते हुए उन्हें अपनी पार्टी में आने का न्योता तक दे डाला है। साथ ही, उन्होंने भाजपा सरकार को एसवाईएल (SYL) के मुद्दे पर घेरते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पंजाब तो बार-बार जाते हैं, लेकिन हरियाणा के हक के पानी पर केवल ‘खानापूर्ति’ कर लौट आते हैं। इनेलो के अभय चौटाला को ‘नॉन-सीरियस’ बताकर दुष्यंत ने मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की पूरी कोशिश की है।

वोटर लिस्ट पर ‘अनिल विज’ के तल्ख तेवर

निकाय चुनावों से पहले एसआईआर (SIR) और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की आशंकाओं पर ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने अपने चिर-परिचित अंदाज में जवाब दिया है। विज ने दो-टूक कहा, “हरियाणा में कोई ज्यादती नहीं होती; न तो नाजायज वोट कटने देंगे और न ही रहने देंगे।” हालांकि, विपक्षी दल विज के इन दावों पर भरोसा करने को तैयार नहीं हैं। कांग्रेस और जजपा ने हर बूथ पर अपने ‘बीएलओ-2’ नियुक्त कर दिए हैं, जो हर फर्जी वोट और गड़बड़ी पर गिद्ध जैसी नजर रखेंगे।

कहाँ-कहाँ होगा सियासी संग्राम?

इस बार की चुनावी जंग का केंद्र मुख्य रूप से तीन नगर निगम होंगे—अंबाला, पंचकूला और सोनीपत। यहाँ महापौरों और पार्षदों के पदों के लिए सीधी टक्कर होगी। इसके अलावा:

नगर परिषद: रेवाड़ी

नगर पालिका: सांपला (रोहतक), धारूहेड़ा (रेवाड़ी) और उकलाना (हिसार)।

इसके साथ ही टोहाना, झज्जर, राजौंद, तरावड़ी, कनीना और सढ़ौरा में रिक्त पड़े वार्डों के लिए उपचुनाव भी संपन्न होंगे।

स्थानीय मुद्दों और प्रदेश की राजनीति के बीच यह निकाय चुनाव 2029 के विधानसभा चुनावों का ‘ट्रेलर’ माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि जनता स्थानीय सुविधाओं के नाम पर वोट देती है या फिर दिग्गजों के दावों पर मुहर लगाती है।

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