Breaking News
Magha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं कियाMagha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं किया

Natural Farming Haryana: हरियाणा कृषि अपडेट: प्राकृतिक खाद की ट्रेनिंग और टिश्यू कल्चर से बढ़ेगी पैदावार, जानें पूरा प्लान

AAmandeep Singh
हरियाणा कृषि अपडेट: प्राकृतिक खाद की ट्रेनिंग और टिश्यू कल्चर से बढ़ेगी पैदावार, जानें पूरा प्लान
शेयर करें
AI Quick Summary

Want to save time? Let our AI read the article and give you 3 quick bullet points.

Listen to this article
AUDIO VERSION

हरियाणा। हरियाणा का किसान अब केवल गेहूं और धान के पारंपरिक चक्र तक सीमित नहीं रहेगा। मुख्यमंत्री नायब सैनी के हालिया कड़े निर्देशों के बाद प्रदेश के कृषि गलियारों में हलचल तेज हो गई है। सरकार का विजन साफ है—खेती को रसायन मुक्त बनाना और किसानों की आय को ‘मल्टीप्लाई’ करना। इसके लिए मुख्यमंत्री ने कृषि एवं बागवानी अधिकारियों को स्पष्ट किया है कि प्रदेश में स्ट्रॉबेरी, नींबू, अमरूद और ड्रैगन फ्रूट जैसी अधिक मुनाफा देने वाली फसलों के लिए विशेष ‘क्लस्टर’ विकसित किए जाएं।

घाटे की चिंता छोड़ें किसान, सरकार बनेगी ढाल

विज्ञापन

प्राकृतिक खेती (Natural Farming) की राह में सबसे बड़ा रोड़ा शुरुआती सालों में उत्पादन का गिरना होता है। मुख्यमंत्री ने इसी डर को खत्म करते हुए एक ऐतिहासिक घोषणा की है। उन्होंने कहा कि जो किसान प्राकृतिक खेती अपनाएंगे और यदि उनके क्लस्टर में उत्पादन उम्मीद से कम रहता है, तो उस आर्थिक नुकसान की भरपाई हरियाणा सरकार करेगी। इसके साथ ही, इन क्लस्टरों में किसानों को प्राकृतिक खाद और कीटनाशक बनाने का विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, ताकि वे बाजार पर निर्भर न रहें।

सेम और लवणीय भूमि के लिए ‘यूकेलिप्टस’ का सहारा

हरियाणा के कई जिलों में जलभराव (Sem) और जमीन का खारापन एक नासूर बना हुआ है। मुख्यमंत्री ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 1.40 लाख एकड़ ऐसी भूमि के सुधार का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। दिलचस्प बात यह है कि इसके लिए ‘जैव निकास’ (Biological Drainage) तकनीक का सहारा लिया जाएगा। नहरों, नालों और खेतों की मेड़ों पर बड़े पैमाने पर सफेदा (यूकेलिप्टस) के पौधे लगाए जाएंगे, जो जमीन से अतिरिक्त पानी को सोखने की प्राकृतिक क्षमता रखते हैं।

लैब से खेत तक: वैज्ञानिक अनुसंधान को नई दिशा

बदलते मौसम और बेमौसम ओलावृष्टि ने पिछले कुछ सालों में किसानों की कमर तोड़ी है। इसे देखते हुए सीएम ने कृषि वैज्ञानिकों को ‘फ्यूचर रेडी’ बीज तैयार करने का टास्क दिया है। अब अनुसंधान ऐसे बीजों और पौधों पर होगा जो प्रतिकूल जलवायु और ओलावृष्टि को सहन कर सकें। साथ ही, नरमा कपास, सरसों, अरहर और सोयाबीन जैसी फसलों की ऐसी संकर किस्में (Hybrid Varieties) तैयार की जाएंगी जो कम लागत में अधिक पैदावार दे सकें। दलहन और गन्ने के लिए ‘टिश्यू कल्चर’ आधारित उत्पादन को भी सरकार बड़े स्तर पर बढ़ावा देने जा रही है।

कुल मिलाकर, हरियाणा सरकार अब खेती को एक ‘बिजनेस मॉडल’ के रूप में देख रही है, जहाँ जोखिम कम हो और मुनाफा अधिक। यदि ये योजनाएं धरातल पर सही ढंग से उतरती हैं, तो हरियाणा जल्द ही देश में ‘ऑर्गेनिक और हॉर्टिकल्चर हब’ बनकर उभरेगा।

विज्ञापन

हरियाणा की और ख़बरें

ताज़ा ख़बरें सीधे अपने ईमेल पर

जगमार्ग न्यूज़ की बड़ी ख़बरें रोज़ अपने इनबॉक्स में पाएं। मुफ़्त, कभी भी अनसब्सक्राइब करें।