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Natural Farming Haryana: हरियाणा के किसानों की मौज: प्राकृतिक खेती पर 5 साल तक मिलेगी ₹10,000 एकड़ सब्सिडी

AAmandeep Singh
हरियाणा के किसानों की मौज: प्राकृतिक खेती पर 5 साल तक मिलेगी ₹10,000 एकड़ सब्सिडी
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हरियाणा। हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र में मुख्यमंत्री नायब सैनी ने प्रदेश के अन्नदाताओं के लिए एक ऐसी योजना का खाका पेश किया है, जो न केवल उनकी जेब भरेगी बल्कि सेहत भी सुधारेगी। मुख्यमंत्री ने सदन को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि अंधाधुंध यूरिया और रसायनों के इस्तेमाल ने हमारी धरती और स्वास्थ्य, दोनों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। इस संकट से उबरने के लिए सरकार ने प्राकृतिक खेती को ‘मिशन मोड’ पर लेने का फैसला किया है। अब जो भी किसान इस पद्धति को अपनाएगा, उसे सरकार अगले पांच साल तक प्रति एकड़ ₹10,000 की प्रोत्साहन राशि देगी। यह कदम उन किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो रसायनों के खर्च से तंग आकर विकल्प तलाश रहे थे।

प्रमाणीकरण की बाधा होगी दूर: अब घर बैठे मिलेगी ‘ऑर्गेनिक’ पहचान

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प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने उत्पाद को ‘शुद्ध’ साबित करने की होती थी। सरकार ने इस समस्या का समाधान निकालते हुए हरियाणा राज्य बीज प्रमाणीकरण एजेंसी को ‘एपीडा’ (APEDA) के तहत एक आधिकारिक प्रमाणीकरण संस्था बनाने का निर्णय लिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब हरियाणा के किसानों को अपने फल, सब्जी या अनाज को जैविक प्रमाणित करवाने के लिए दर-दर नहीं भटकना होगा। एक बार सर्टिफिकेशन मिलने के बाद किसान अपने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर ऊंचे दामों पर बेच सकेंगे, जिससे उनकी आय में भारी इजाफा होना तय है।

देसी गाय और प्राकृतिक खाद पर फोकस: कुरुक्षेत्र का मॉडल बनेगा मिसाल

मुख्यमंत्री ने कुरुक्षेत्र के गुरुकुल फार्म का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे 180 एकड़ भूमि पर बिना किसी रासायनिक खाद के, केवल गाय के गोबर और गोमूत्र से तैयार जीवामृत, घनामृत और बीजामृत के जरिए बंपर पैदावार ली जा रही है। इसी तर्ज पर पूरे प्रदेश में काम होगा। सरकार अब तक 523 देसी गायों की खरीद के लिए ₹1.30 करोड़ की सब्सिडी बांट चुकी है। योजना के तहत हर देसी गाय की खरीद पर ₹30,000 का अनुदान दिया जा रहा है। इसके अलावा, प्राकृतिक खाद तैयार करने के लिए किसानों को ड्रम और अन्य उपकरणों के लिए भी लाखों रुपये की सहायता दी गई है।

राजनीति से ऊपर उठकर जन आंदोलन बनाने की अपील

सदन में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने एक भावुक अपील भी की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक जन आंदोलन होना चाहिए। उन्होंने सभी विधायकों और जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर अपने-अपने क्षेत्रों में किसानों को जागरूक करें। ‘प्राकृतिक खेती पोर्टल’ के माध्यम से अब तक हजारों किसान प्रशिक्षण ले चुके हैं और सरकार अब इनकी ब्रांडिंग और पैकेजिंग के लिए भी विशेष फंड जारी कर रही है। हरियाणा, जो अपनी पहचान एक कृषि प्रधान राज्य के रूप में रखता है, अब प्राकृतिक खेती के मामले में देश का मार्गदर्शक बनने की ओर अग्रसर है।

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