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Haryana Land Revenue System: हरियाणा में ज़मीन की रजिस्ट्री और इंतकाल का बदल गया नियम, अब घर बैठे होंगे सारे काम

AAmandeep Singh
हरियाणा में ज़मीन की रजिस्ट्री और इंतकाल का बदल गया नियम, अब घर बैठे होंगे सारे काम
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हरियाणा।  हरियाणा में भूमि सुधारों को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर राजस्व विभाग तक एक बड़ी हलचल देखी जा रही है। ज़मीन से जुड़े विवादों और फाइलों के अंबार को खत्म करने के लिए सरकार ने ‘डिजिटल हरियाणा’ की दिशा में अपना सबसे बड़ा दांव खेला है। अगले महीने से लागू होने वाली नई व्यवस्था के तहत अब ज़मीन की रजिस्ट्री से लेकर उसके इंतकाल (म्यूटेशन) तक की सारी कड़ियां एक ही एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सिमट जाएंगी। इसका सबसे बड़ा फायदा आम आदमी को होगा, जिसे अब छोटे-छोटे कामों के लिए बिचौलियों या सरकारी दफ्तरों की मिन्नतें नहीं करनी पड़ेंगी।

1900 ‘स्मार्ट’ पटवारियों की फौज संभालेगी कमान

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इस व्यवस्था को केवल कागजों या पोर्टल्स तक सीमित न रखकर ज़मीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने 1900 नए पटवारियों की भर्ती और प्रशिक्षण का काम पूरा कर लिया है। ये पटवारी पारंपरिक बस्तों के बजाय डिजिटल गैजेट्स से लैस होंगे। इनका मुख्य जिम्मा ज़मीन के रिकॉर्ड को अपडेट करना, लाल डोरा क्षेत्रों के डिजिटल नक्शे तैयार करना और एग्रीस्टैक (AgriStack) के तहत डेटा का सत्यापन करना होगा। खास बात यह है कि ज़मीन के रिकॉर्ड को यूनिक पहचान से जोड़ा जाएगा, जिससे मालिकाना हक को लेकर होने वाली धोखाधड़ी की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाएगी।

तकनीक का तड़का: रोवर से पैमाइश और पेपरलेस म्यूटेशन

अब तक ज़मीन की नाप-जोख में होने वाली गलतियां विवाद का सबसे बड़ा कारण बनती थीं। सरकार अब इसके लिए ‘रोवर तकनीक’ (Rover Technology) को अनिवार्य कर रही है, जिससे इंच-दर-इंच की सटीक पैमाइश संभव होगी। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, डिजिटल पहल के तहत अब तक आए 3 लाख आवेदनों में से करीब 84% का निस्तारण किया जा चुका है। नई प्रणाली आने के बाद यह गति और भी तेज होगी। नागरिक अब घर बैठे अपने दस्तावेज अपलोड कर सकेंगे और आवेदन की स्थिति (Status) ऑनलाइन ट्रैक कर पाएंगे।

किसानों और आमजन को ‘तारीख’ से मिलेगी मुक्ति

लंबे समय से लंबित ज़मीनी मामलों का निपटारा अब तय समय सीमा (Timeline) के भीतर करना अनिवार्य होगा। भ्रष्टाचार और लालफीताशाही पर चोट करते हुए सरकार ने संकेत दिया है कि इस सिस्टम में मानवीय हस्तक्षेप (Manual Intervention) कम से कम होगा। किसानों के लिए यह व्यवस्था किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि उन्हें अपनी फसलों का ब्योरा देने या पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के लिए पटवारियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। कुल मिलाकर, हरियाणा की यह नई राजस्व नीति ज़मीन से जुड़े कागजी जाल को सुलझाने और पारदर्शिता लाने की दिशा में एक ‘गेमचेंजर’ साबित हो सकती है।

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