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Haryana News: राज्यसभा चुनाव के लिए सतीश नांदल ने भरा नामांकन, कांग्रेस से व भाजपा के उम्मीदवार भी दाखिल कर चुके पर्चा

VVinita Kohli
Haryana News: राज्यसभा चुनाव के लिए सतीश नांदल ने भरा नामांकन, कांग्रेस से व भाजपा के उम्मीदवार भी दाखिल कर चुके पर्चा
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चंडीगढ़: हरियाणा में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी की ओर से संजय भाटिया ने राज्यसभा सीट के लिए नामांकन दाखिल किया, जबकि कांग्रेस ने कर्मवीर सिंह बौद्ध को उम्मीदवार बनाया है। दोनों उम्मीदवारों के नामांकन के बाद अब तीसरे प्रत्याशी के रूप में रोहतक जिले के किलोई गांव के रहने वाले सतीश नांदल ने भी विधानसभा पहुंचकर अपना नामांकन पत्र जमा कर दिया। नांदल निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में आए हैं। उनके साथ निर्दलीय विधायक सावित्री जिंदल, देवेंद्र कादियान और राजेश जून मौजूद रहे। तीन उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा तेज हो गई है।

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भाजपा और कांग्रेस उम्मीदवार पहले ही भर चुके नामांकन

हरियाणा में राज्यसभा सीट के लिए भाजपा उम्मीदवार संजय भाटिया ने सबसे पहले नामांकन दाखिल किया। उनके साथ मुख्यमंत्री नायब सैनी भी मौजूद रहे। इसके बाद कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार कर्मवीर सिंह बौद्ध को नामांकन के लिए विधानसभा भेजा। कांग्रेस उम्मीदवार के नामांकन के समय पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित पार्टी के 34 विधायक मौजूद रहे। इससे पहले कर्मवीर बौद्ध ने कांग्रेस कार्यालय में भी नामांकन पत्र की औपचारिकताएं पूरी की थीं। पार्टी नेतृत्व की ओर से उन्हें हरियाणा से राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया गया।

सतीश नांदल ने तीसरे प्रत्याशी के रूप में दाखिल किया पर्चा

रोहतक जिले के किलोई गांव के रहने वाले सतीश नांदल ने राज्यसभा चुनाव के लिए तीसरे उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया। वे दोपहर करीब दो बजे विधानसभा भवन पहुंचे और पर्चा जमा किया। उनके साथ निर्दलीय विधायक सावित्री जिंदल, देवेंद्र कादियान और राजेश जून मौजूद रहे। नामांकन से पहले मीडिया से बातचीत में सतीश नांदल ने कहा कि कुछ विधायकों ने यह विचार रखा कि चुनाव में एक निर्दलीय उम्मीदवार भी होना चाहिए। इसी सोच के तहत उन्होंने नामांकन दाखिल करने का फैसला किया। उनके मैदान में उतरने से चुनाव में संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

कांग्रेस ने खेला होने की संभावना को नकारा

तीन उम्मीदवारों के मैदान में आने के बाद राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर क्रॉस वोटिंग या राजनीतिक उलटफेर की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि कांग्रेस उम्मीदवार कर्मवीर सिंह बौद्ध ने ऐसे किसी भी संभावना से इनकार किया है। उनका कहना है कि कांग्रेस पार्टी के सभी 37 विधायक एकजुट हैं और पूरी तरह उनके साथ खड़े हैं। बौद्ध ने कहा कि पार्टी के भीतर कोई मतभेद नहीं है और चुनाव परिणाम को लेकर उन्हें भरोसा है।

कौन हैं कांग्रेस उम्मीदवार कर्मवीर सिंह बौद्ध

कर्मवीर सिंह बौद्ध हरियाणा के अंबाला के रहने वाले हैं और हरियाणा सिविल सचिवालय में प्रशासनिक अधिकारी यानी एडीओ के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। वे करीब चार साल पहले इस पद से रिटायर हुए थे। उनकी पत्नी श्रम विभाग में असिस्टेंट के पद पर कार्यरत हैं। सचिवालय में कार्यकाल के दौरान कर्मवीर बौद्ध खरीद और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े काम देखते थे और केयरटेकर की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। सरकारी सेवा से जुड़े अनुभव के कारण उन्हें प्रशासनिक मामलों की अच्छी समझ रखने वाला व्यक्ति माना जाता है।

निलंबन विवाद के बाद बिना प्रमोशन हुए रिटायर

कर्मवीर बौद्ध के सरकारी सेवा काल में एक विवाद भी सामने आया था। सचिवालय में कार्यरत रहने के दौरान एक मामले में विवाद हुआ और बाद में स्टोर में आग लगने की घटना के बाद उन पर आरोप लगे। उस समय के चीफ सेक्रेटरी ने उन्हें निलंबित कर दिया था। इसके बाद उन्हें आगे कोई पदोन्नति नहीं मिली और वे एडीओ पद से ही सेवानिवृत्त हो गए। इस घटना के बावजूद वे सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे और विभिन्न मुद्दों पर आवाज उठाते रहे।

कांग्रेस में संतुलित चेहरे के रूप में उभरे बौद्ध

कांग्रेस में कर्मवीर सिंह बौद्ध किसी एक गुट से जुड़े नेता नहीं माने जाते। पार्टी के भीतर उन्हें एक संतुलित और सर्वस्वीकार्य चेहरा माना जा रहा है। वे ‘संविधान बचाओ अभियान’ जैसे कार्यक्रमों में सक्रिय रहे हैं और पार्टी के जमीनी कार्यक्रमों में भागीदारी करते रहे हैं। अनुसूचित जाति समुदाय से आने वाले बौद्ध को सामाजिक संतुलन के नजरिये से भी अहम उम्मीदवार माना जा रहा है। इसी कारण पार्टी नेतृत्व ने उन्हें राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाने का फैसला किया।

सामाजिक मुद्दों और आंदोलनों में सक्रिय भूमिका

कर्मवीर सिंह बौद्ध लंबे समय से अनुसूचित जाति समाज, कर्मचारियों और वंचित वर्गों से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे हैं। पिछले साल हरियाणा की राजनीति में चर्चा में आए आईपीएस वाई पूरन कुमार से जुड़े आत्महत्या मामले के बाद हुए आंदोलन में भी वे सक्रिय रूप से शामिल रहे थे। इस आंदोलन में उनकी भूमिका को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा रही थी। सामाजिक मुद्दों पर सक्रियता के कारण वे कई संगठनों से जुड़े रहे हैं।


राहुल गांधी तक पहुंचने में वरिष्ठ आईएएस की भूमिका

सूत्रों के अनुसार कर्मवीर सिंह बौद्ध को कांग्रेस नेतृत्व तक पहुंचाने में हरियाणा के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। बताया जाता है कि यह अधिकारी वर्तमान में अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर पर कार्यरत हैं और अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं। उनके कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से भी अच्छे संबंध बताए जाते हैं। इन्हीं के माध्यम से बौद्ध की पार्टी नेतृत्व तक पहुंच बनी और बाद में उनका नाम राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में सामने आया। यह भी बताया जाता है कि उस अधिकारी के परिवार में करीब 22 आईएएस और पीसीएस अधिकारी हैं।

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