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Haryana Cab Rules: ओला-उबर की सर्ज प्राइसिंग पर हरियाणा सरकार का बड़ा एक्शन, अब नहीं वसूल पाएंगे मनमाना किराया

AAmandeep Singh
Haryana Cab Rules: ओला-उबर की सर्ज प्राइसिंग पर हरियाणा सरकार का बड़ा एक्शन, अब नहीं वसूल पाएंगे मनमाना किराया
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गुरुग्राम। देर रात दफ्तर से घर लौटना हो, अलसुबह एयरपोर्ट भागना हो या फिर मानसून की पहली बारिश में दफ्तर पहुंचना— दिल्ली-एनसीआर समेत हरियाणा के बड़े शहरों में रहने वालों की जिंदगी काफी हद तक ओला और उबर जैसी कैब सेवाओं के इर्द-गिर्द सिमट चुकी है। लेकिन इस सहूलियत के साथ जो सबसे बड़ी कसक यात्रियों को चुभती थी, वह थी मोबाइल स्क्रीन पर अचानक उभरने वाला ‘सर्ज प्राइस’। जो सफर अमूमन 200 रुपये में पूरा होता था, जरा सी बारिश या दफ्तर की छुट्टी के वक्त वह सीधे 700 रुपये पार कर जाता था। टेक कंपनियों की इस ‘किराया लूट’ पर अब हरियाणा सरकार ने कानूनी हथौड़ा चला दिया है। राज्य सरकार ने नई पॉलिसी नोटिफाई कर डायनामिक और सर्ज प्राइसिंग के इस अनियंत्रित खेल को पूरी तरह बैन कर दिया है।

‘डेड माइलेज’ का बोझ यात्री क्यों उठाएं? सरकार ने बदला दशकों पुराना नियम

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कैब कंपनियों के किरायों में होने वाली धांधली को रोकने के लिए ‘हरियाणा मोटर वाहन (संशोधन) नियम, 2026’ में कई क्रांतिकारी बदलाव किए गए हैं। इसमें सबसे बड़ी राहत ‘डेड माइलेज’ को खत्म करके दी गई है। अक्सर कंपनियां यह तर्क देती थीं कि ड्राइवर आपको पिक करने के लिए 5 किलोमीटर दूर से खाली गाड़ी लेकर आया है, इसलिए वह अतिरिक्त किराया जोड़ती थीं।

नई पॉलिसी का सख्त निर्देश:

“अब नियम बिल्कुल आईने की तरह साफ है। यात्री सिर्फ उसी दूरी का भुगतान करेगा, जिसमें उसने बैठकर सफर किया है। कैब ऑपरेटर गाड़ी को पिक-अप पॉइंट तक लाने का कोई भी अतिरिक्त चार्ज उपभोक्ता की जेब पर नहीं डाल सकते।”

अगर कोई भी एग्रीगेटर कंपनी बिना किसी ठोस या वैध तकनीकी कारण के किराया बढ़ाती हुई पाई गई, तो परिवहन आयुक्त को यह अधिकार होगा कि वह उस कंपनी का ऑपरेटिंग लाइसेंस तत्काल प्रभाव से तीन महीने के लिए निलंबित या हमेशा के लिए रद्द कर सके।

ड्राइवरों की जेब भी होगी मजबूत; महिला सुरक्षा को लेकर अभेद्य सुरक्षा चक्र

यह नई नीति सिर्फ यात्रियों को राहत नहीं देती, बल्कि उन कैब ड्राइवरों के चेहरों पर भी मुस्कान लाने वाली है जो दिन-रात सड़कों पर गाड़ी दौड़ाते हैं। अब तक कंपनियों के मोटे कमीशन से परेशान ड्राइवरों के लिए सरकार ने तय कर दिया है कि प्रति ट्रिप मिलने वाले कुल किराए का न्यूनतम 80% हिस्सा सीधे ड्राइवर के खाते में जाएगा। कंपनियां महज 20 फीसदी ही अपने पास रख सकेंगी।

इसके साथ ही, महिला यात्रियों की सुरक्षा को लेकर कैब के भीतर के नियम पूरी तरह बदल दिए गए हैं। अब हर एग्रीगेटर वाहन में:

चालू हालत में जीपीएस (GPS) और पैनिक बटन होना अनिवार्य है।

गाड़ी के भीतर फर्स्ट एड किट और अग्निशामक यंत्र (Fire Extinguisher) हर वक्त मौजूद रहेगा।

रूट डेविएशन अलर्ट: सबसे महत्वपूर्ण तकनीक बदलाव यह है कि यदि ड्राइवर ने नेविगेशन ऐप द्वारा दिखाए गए रूट को छोड़कर किसी अन्य सुनसान या अनजाने रास्ते पर गाड़ी मोड़ी, तो कंपनी के 24×7 एक्टिव रहने वाले केंद्रीय कंट्रोल रूम में तुरंत इमरजेंसी अलर्ट चला जाएगा।

हरियाणा सरकार के इस कड़े कदम ने यह साफ संदेश दे दिया है कि बहुराष्ट्रीय टेक कंपनियां अब सिर्फ सॉफ्टवेयर और एल्गोरिदम की आड़ लेकर मनमानी नहीं कर सकतीं। उन्हें हर हाल में राज्य के कानून, जनहित और जवाबदेही के दायरे में रहकर ही अपना कारोबार करना होगा।

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