October 3, 2026

Shahabad Kisan Panchayat: 7.64 लाख एकड़ धान का वेरिफिकेशन अटका, परेशान किसान, 5 अक्टूबर को शाहाबाद में महापंचायत

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Shahabad Kisan Panchayat: 7.64 लाख एकड़ धान का वेरिफिकेशन अटका, परेशान किसान, 5 अक्टूबर को शाहाबाद में महापंचायत

7.64 लाख एकड़ धान का वेरिफिकेशन अटका, परेशान किसान, 5 अक्टूबर को शाहाबाद में महापंचायत

Shahabad Kisan Panchayat: हरियाणा के मंडियों में धान की आवक शुरू होते ही सरकारी खरीद व्यवस्था और जमीन सत्यापन के मुद्दे पर एक बार फिर किसान आंदोलन की आहट सुनाई देने लगी है। भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के प्रमुख गुरनाम सिंह चढूनी ने  5 अक्टूबर को कुरुक्षेत्र जिले के शाहाबाद में किसान पंचायत का ऐलान किया है। (Meri Fasal Mera Byora verification) इस बार किसान संगठन का रुख बेहद आक्रामक नजर आ रहा है। चढूनी ने किसानों से स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वे इस बार अपनी सुरक्षा और अधिकार के लिए लाठियां (लठ) साथ लेकर शाहाबाद पहुंचे।

शाहाबाद का वही ‘शहीद उधम सिंह स्मारक’ (Kurukshetra Shahabad Shahid Udham Singh Smarak) एक बार फिर किसान आंदोलन का केंद्र बनने जा रहा है, जहां बीते 22 सितंबर को प्रदर्शनकारी किसानों पर पुलिस ने वॉटर कैनन और आंसू गैस के गोले दागे थे। पिछली घटना का जिक्र करते हुए चढूनी ने कहा कि इस बार किसान किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे।

“अगर इस बार सरकार हमारे ऊपर लठ उठाती है, तो तुम लोगों को भी इसका जवाब देना है। इस बार 5 (BKU Charuni Shahabad 5 October kisan panchayat) तारीख को सभी लठ लेकर आओ। जिसके खून में उबाल है, वह ज्यादा से ज्यादा संख्या में शाहाबाद पहुंचे, क्योंकि अब लड़ाई ‘करो या मरो’ की है। किसी किसान को परेशान होकर जहर खाने की जरूरत नहीं, बल्कि अब समय अपनी मांगों और हक के लिए सरकार की नाक में दम करने का है।”

— गुरनाम सिंह चढूनी, राष्ट्रीय अध्यक्ष, भाकियू (चढूनी)

7.64 लाख एकड़ धान का वेरिफिकेशन अटका, गेट पास न मिलने से मंडियों में पसरा सन्नाटा

विवाद की असली जड़ ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर पंजीकृत फसलों का सत्यापन है। (Haryana kisan andolan) कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में करीब 24 लाख एकड़ रकबे में धान की फसल का पंजीकरण कराया गया है। किसान नेता गुरनाम चढूनी का आरोप है कि इसमें से 7 लाख 64 हजार एकड़ से अधिक फसल का भौतिक सत्यापन (वेरिफिकेशन) अभी तक प्रशासनिक सुस्ती के कारण लटका हुआ है।

सत्यापन पूरा न होने की वजह से मंडी अधिकारी किसानों को धान लाने के लिए ‘गेट पास’ जारी नहीं कर रहे हैं। जिन किसानों की फसल कटकर तैयार है, वे मंडियों के बाहर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ कतार में खड़े रहने को मजबूर हैं। (paddy gate pass delay) कई जगह जो सीमित खरीद हुई भी है, वहां से धान का उठान न होने के कारण मंडियों में अटूट जाम और फसल के खराब होने का खतरा पैदा हो गया है।

घोटाला रोकने की दलील या आढ़तियों को फायदा पहुंचाने की साजिश?

दूसरी ओर, प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि धान खरीद में होने वाले भ्रष्टाचार, फर्जी गिरदावरी और बाहरी राज्यों के धान की अवैध आवक को रोकने के लिए पहली बार इतने कड़े स्तर पर कंबाइन और खेतों का भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है। सरकार का तर्क है कि पारदर्शी व्यवस्था से असली किसानों को ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ मिलेगा।

हालांकि, किसान संगठनों का नजरिया बिल्कुल अलग है। भाकियू का आरोप है कि सत्यापन में हो रही देरी कोई प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सोची-समझी नीति है। किसान नेताओं का कहना है कि किसानों को इतना परेशान कर दिया जाए कि वे थक-हारकर अपनी फसल बिचौलियों, आढ़तियों या निजी व्यापारियों को ओने-पोने दामों पर बेचने के लिए मजबूर हो जाएं। इन्हीं समस्याओं के स्थायी समाधान और रुके हुए सत्यापन को तुरंत पूरा कराने की मांग को लेकर चढूनी ने प्रदेश भर के किसान संगठनों से एकजुट होकर शाहाबाद पहुंचने की अपील की है।

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