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Haryana Panchayat Rules: हरियाणा में पंचायतों को मिली असीमित ताकत: अब सरपंच खुद काटेंगे अवैध पानी के कनेक्शन, दर्ज होगी FIR

AAmandeep Singh
हरियाणा में पंचायतों को मिली असीमित ताकत: अब सरपंच खुद काटेंगे अवैध पानी के कनेक्शन, दर्ज होगी FIR
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हरियाणा। हरियाणा की ग्रामीण व्यवस्था में अब पानी की हर बूंद का हिसाब-किताब रखने की जिम्मेदारी जनस्वास्थ्य विभाग के दफ्तरों से निकलकर सीधे चौपाल तक पहुंच गई है। सरकार ने गवर्नमेंट कम्युनिटी पार्टनरशिप (GCP) मॉडल को हरी झंडी देते हुए पंचायतों को प्रशासनिक रूप से और मजबूत कर दिया है। नई नीति के अनुसार, अब गांवों में पीने के पानी की सप्लाई कब होगी, कितनी देर होगी और उसका क्या रेट होगा, यह सब तय करने का हकदार स्थानीय नेतृत्व होगा। इस कदम से न केवल सरकारी लेती-देती और लालफीताशाही पर लगाम लगेगी, बल्कि ग्रामीण स्तर पर पानी की बर्बादी को भी रोका जा सकेगा।

5 सदस्यीय समिति संभालेगी ग्राउंड जीरो का जिम्मा

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नई व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए कागजी कोरम पूरा करने के बजाय एक बेहद व्यावहारिक ढांचा तैयार किया गया है। हर गांव में एक पांच सदस्यीय ‘ग्राम जल एवं सीवरेज समिति’ का गठन किया जाएगा। इस समिति में ग्राम सचिव और पंप ऑपरेटर के साथ-साथ जनस्वास्थ्य विभाग के जूनियर इंजीनियर (JE) को भी जोड़ा गया है ताकि तकनीकी दिक्कतों को मौके पर ही सुलझाया जा सके। इसके अलावा गांव के प्रबुद्ध नागरिकों को भी इसमें जगह मिलेगी। यह समिति तय करेगी कि गांव के किस कोने में नई पाइपलाइन बिछनी है और कहां तुरंत मरम्मत की दरकार है।

दबंगई और चोरी पर चलेगा चाबुक, सीधे दर्ज होगी एफआईआर

अब तक ग्रामीण इलाकों में रसूख या दबंगई के दम पर अवैध कनेक्शन चलाने वालों पर कार्रवाई करने में विभागीय अधिकारियों के पसीने छूट जाते थे। लेकिन अब सरकार ने पंचायतों को सीधा डंडा थमा दिया है। नई पॉलिसी के तहत पंचायतों के पास यह कानूनी अधिकार होगा कि वे अवैध या दूषित पानी के कनेक्शन को मौके पर ही काट दें। यही नहीं, बार-बार चेतावनी के बाद भी धांधली करने वालों पर भारी-भरकम जुर्माना ठोकने और पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की शक्ति भी अब पंचायत के पास सुरक्षित होगी। वहीं, जो लोग अपने कनेक्शन को वैध कराना चाहते हैं, उनके लिए नियमों को बेहद आसान बनाया गया है।

दो चरणों में बदलेगी सूरत, महिलाओं को मिलेगा रोजगार का मौका

जनस्वास्थ्य विभाग इस पूरी योजना को दो अलग-अलग चरणों में अमलीजामा पहनाने जा रहा है। पहले चरण में उन गांवों को शॉर्टलिस्ट किया गया है जो आकार में ‘एकल’ हैं यानी जहां एक ही ग्राम पंचायत पूरे गांव की व्यवस्था देखती है। इसके बाद दूसरे चरण में बहु-ग्राम (एक से अधिक गांव वाली) पंचायतों को इस व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।

इस नीति की सबसे खूबसूरत बात इसका सोशल इंजीनियरिंग मॉडल है। पानी के कनेक्शन की चेकिंग, बिलों की समय पर वसूली और वॉटर सैंपलिंग (पानी की जांच) जैसे बारीक कामों के लिए गांव की महिलाओं को आगे लाया जा रहा है। हर 500 घरों के क्लस्टर पर एक और इससे अधिक आबादी होने पर दो महिलाओं को तैनात किया जाएगा। उन्हें काम के बदले सीधे उनके बैंक खातों में इंसेंटिव (प्रोत्साहन राशि) भेजी जाएगी, जिससे ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन को भी एक नई उड़ान मिलेगी। यह पूरा करार शुरुआती तौर पर 5 वर्षों के लिए किया जा रहा है।

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