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Haryana Police Recruitment: हरियाणा पुलिस भर्ती: हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, जनरल से ज्यादा अंक वाले आरक्षित छात्र परीक्षा में होंगे शामिल

AAmandeep Singh
हरियाणा पुलिस भर्ती: हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, जनरल से ज्यादा अंक वाले आरक्षित छात्र परीक्षा में होंगे शामिल
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हरियाणा। हरियाणा पुलिस में 5500 कांस्टेबल पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया अब कानूनी पेच और राहत के बीच झूल रही है। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) द्वारा लागू की गई नई कट-ऑफ नीति से बाहर हुए आरक्षित वर्ग के सैकड़ों अभ्यर्थियों के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट उम्मीद की नई किरण बनकर उभरा है। जस्टिस जेएस पुरी की खंडपीठ ने स्पष्ट आदेश दिया है कि जिन युवाओं के अंक सामान्य श्रेणी की कट-ऑफ से अधिक हैं, उन्हें चयन प्रक्रिया के अगले चरणों से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इन याचिकाकर्ताओं को प्रोविजनल तौर पर CET-2 में शामिल होने की अनुमति प्रदान कर दी है।

मेरिट में होने के बावजूद क्यों बाहर हुए थे युवा?

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पूरा विवाद उस वक्त शुरू हुआ जब HSSC ने शारीरिक परीक्षण (PMT) के लिए उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया। नियमानुसार, CET-1 पास करने वाले कई आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों के अंक सामान्य वर्ग की कट-ऑफ (52.17) से कहीं ज्यादा थे। लेकिन आयोग ने अचानक श्रेणीवार नई कट-ऑफ लागू कर दी, जिसके चलते मेरिट में ऊंचे स्थान पर होने के बावजूद ये छात्र प्रक्रिया से बाहर हो गए। इस कदम को अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट के उन फैसलों के खिलाफ बताया, जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि यदि आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार जनरल कट-ऑफ पार करता है, तो उसे जनरल कैटेगरी में ही गिना जाना चाहिए।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी और 2 जुलाई की तारीख

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर गौर करते हुए हाई कोर्ट ने माना कि प्रथम दृष्टया यह मामला संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है। अदालत ने हरियाणा सरकार और HSSC को नोटिस जारी कर इस प्रक्रिया पर विस्तार से जवाब मांगा है। हालांकि, भर्ती पर फिलहाल कोई स्टे नहीं है, लेकिन कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि इन उम्मीदवारों का भविष्य और अंतिम परिणाम कोर्ट के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा। अब सबकी नजरें 2 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां सरकार को अपनी नीति का बचाव करना होगा।

क्या होगा भर्ती प्रक्रिया पर असर?

आयोग वर्तमान में पीएमटी (PMT) प्रक्रिया संचालित कर रहा है, जिसके बाद पीएसटी (PST) और अंत में लिखित परीक्षा होनी है। हाई कोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद अब आयोग को उन सभी शॉर्टलिस्टेड उम्मीदवारों के लिए इंतजाम करने होंगे जो कोर्ट की शरण में गए थे। जानकारों का मानना है कि यदि फैसला अभ्यर्थियों के पक्ष में आता है, तो आयोग को अपनी पूरी शॉर्टलिस्टिंग प्रक्रिया में बड़ा फेरबदल करना पड़ सकता है। फिलहाल, युवाओं के लिए राहत की बात यह है कि उनकी मेहनत बेकार नहीं जाएगी और वे प्रोविजनल तौर पर परीक्षा दे सकेंगे।

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