Haryana Power Strike: हरियाणा में बिजली कर्मियों की हड़ताल ने अब विकराल रूप ले लिया है। लगातार दूसरे दिन भी प्रदेश के अधिकांश जिलों में अंधेरा पसरा रहा, जिससे आम आदमी का सब्र पूरी तरह जवाब दे चुका है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि लोगों को बुनियादी जरूरतों—बिजली, पानी और मोबाइल चार्जिंग—के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। गुरुग्राम और नूंह में बिजली आपूर्ति के निजीकरण के खिलाफ शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन अब पूरे हरियाणा की रगें जकड़ चुका है।
मोमबत्ती के सहारे रात, धंधा चौपट
गुरुग्राम में गुरुवार की रात दुकानदारों को अंधेरे के बीच मोमबत्तियां जलाकर गुजारनी पड़ी। पानीपत के सेक्टर-25 के दुकानदार बिजेंद्र जैन का दर्द साफ झलकता है, जिन्होंने बताया कि बिजली न होने के कारण उन्हें दूध और दही के सारे ऑर्डर रद्द करने पड़े हैं। पिछले चौबीस घंटों में बिजली सिर्फ एक-दो बार चंद मिनटों के लिए आई,
जिससे इलेक्ट्रॉनिक कांटे और दुकान के तमाम उपकरण पूरी तरह ठप पड़ गए हैं। उधर, संकट को और गहराते हुए पानीपत थर्मल पावर प्लांट की दो यूनिटें भी बंद कर दी गई हैं, जिसका सीधा असर पानीपत, करनाल, रोहतक, सोनीपत, अंबाला, हिसार, गुरुग्राम और फरीदाबाद की सप्लाई पर पड़ा है।
पानी के लिए बैलगाड़ी और अस्पताल में चार्जिंग की कतारें
घरों के अंदर का हाल यह है कि पानी की मोटरें न चलने से नलों में एक बूंद पानी नहीं आ रहा है। जींद के जुलाना में एक महिला को पानी का संकट ऐसा सताया कि उसे अपनी जरूरत पूरी करने के लिए बैलगाड़ी पर पानी ढोकर लाना पड़ा। नारनौल में स्थिति इतनी अजीबोगरीब हो गई है कि लगातार बिजली न रहने से लोगों के मोबाइल फोन डिस्चार्ज होकर डेड हो चुके हैं। मजबूरी में लोग अपने फोन चार्ज कराने के लिए नागरिक अस्पताल की तरफ दौड़ रहे हैं, जहां चार्जिंग पॉइंट के आगे लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं।
सड़कों पर उतरे लोग, नेताओं के दफ्तरों का घेराव
गुस्साई जनता अब सड़कों पर उतरने लगी है। फरीदाबाद में मस्जिद चौक के पास एनआईटी नंबर-3 की महिलाओं ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर सड़क पर जाम लगा दिया और बिजली निगम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके अलावा फरीदाबाद में ही लोग स्थानीय भाजपा विधायक मूलचंद शर्मा के कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए।
सोनीपत के बहालगढ़ रोड पर भी 24 घंटे से बिजली न आने से भड़के लोगों ने चक्का जाम कर दिया, जिसके बाद अधिकारियों ने शाम चार बजे तक बिजली बहाल करने का आश्वासन देकर बमुश्किल स्थिति संभाली। यमुनानगर में भी लोग हाथों में खाली बाल्टियां लेकर सड़कों पर प्रदर्शन करते नजर आए, जहां पानी और बिजली दोनों के बिना बच्चों का बुरा हाल है।

