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Haryana Rajya Sabha Election: हरियाणा राज्यसभा चुनाव: 4 वोट रद्द होने पर भड़की कांग्रेस, हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने का फैसला

AAmandeep Singh
हरियाणा राज्यसभा चुनाव: 4 वोट रद्द होने पर भड़की कांग्रेस, हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने का फैसला
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हरियाणा। हरियाणा की सियासत में राज्यसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद भी तूफान थमता नजर नहीं आ रहा है। दो सीटों के लिए हुए इस हाई-वोल्टेज ड्रामे का अगला पड़ाव अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट बनने जा रहा है। कांग्रेस पार्टी ने अपने चार विधायकों के वोट रद्द किए जाने को तकनीकी खामी नहीं, बल्कि एक गहरी सियासी साजिश करार दिया है। पार्टी का स्पष्ट आरोप है कि चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों ने सत्ता के रसूख के आगे घुटने टेक दिए और जानबूझकर उनके वैध वोटों को खारिज कर दिया। इस कानूनी चुनौती ने न केवल चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में बड़े उलटफेर के संकेत भी दे दिए हैं।

4 वोटों का ‘अवैध’ खेल और कांग्रेस की घेराबंदी

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हैरानी की बात यह है कि कांग्रेस के उम्मीदवार करमवीर बौध ने जीत की दहलीज तो लांघी, लेकिन प्रक्रिया के दौरान 4 वोटों का रद्द होना और 5 विधायकों द्वारा पाला बदलना पार्टी के लिए गहरे जख्म की तरह है। कांग्रेस के कानूनी विशेषज्ञों का तर्क है कि निर्वाचन अधिकारी (RO) ने वोटों की स्क्रूटनी के समय पारदर्शिता नहीं बरती। पार्टी अब कोर्ट से मांग करेगी कि मतदान के दिन की पूरी वीडियोग्राफी और रिकॉर्डिंग को तलब किया जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। भूपेंद्र सिंह हुड्डा और प्रदेश अध्यक्ष ने दो टूक कहा है कि यह लोकतंत्र की हत्या है और वे इसे सड़क से लेकर अदालत तक लड़ेंगे।

सतीश नांदल की चुनौती और ‘बेनीवाल’ फैक्टर

जंग सिर्फ एक तरफा नहीं है। जहां कांग्रेस धांधली का रोना रो रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल ने भी जवाबी हमला बोलने की तैयारी कर ली है। चर्चा है कि नांदल कांग्रेस विधायक भारत सिंह बेनीवाल के वोट की वैधता को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह मामला और भी पेचीदा हो जाएगा। फिलहाल, कांग्रेस आलाकमान ने वरिष्ठ वकीलों की एक फौज को याचिका तैयार करने के काम में लगा दिया है, जो न केवल स्टे (स्थगन) की मांग करेगी बल्कि उन परिस्थितियों की न्यायिक जांच भी चाहेगी जिनमें वोट रद्द करने का फैसला लिया गया।

अंतर्कलह और बाहरी दबाव के बीच फंसी कांग्रेस

इस पूरे प्रकरण ने हरियाणा कांग्रेस के भीतर की गुटबाजी और अंतर्कलह को भी एक बार फिर सतह पर ला दिया है। एक तरफ जहां पार्टी बाहरी ताकतों और प्रशासनिक अधिकारियों पर दोष मढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ अपनों की ‘क्रॉस वोटिंग’ ने हाईकमान की चिंताएं बढ़ा दी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाईकोर्ट में जाने का फैसला केवल कानूनी राहत पाने के लिए नहीं, बल्कि पार्टी के कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने की एक कवायद भी है। अब सबकी निगाहें हाईकोर्ट की पहली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां से तय होगा कि राज्यसभा की यह ‘जंग’ किस करवट बैठेगी।

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