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Haryana RTE Admission 2026: हरियाणा में RTE 2026 दाखिला प्रक्रिया शुरू, गरीब बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में मिलेगा एडमिशन

AAmandeep Singh
हरियाणा में RTE 2026 दाखिला प्रक्रिया शुरू, गरीब बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में मिलेगा एडमिशन
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हरियाणा।  हरियाणा में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ने का मौका देने वाली प्रक्रिया शुरू हो गई है। पंचकुला स्थित शिक्षा विभाग के मौलिक शिक्षा निदेशालय ने Right to Education Act के तहत सत्र 2026 के लिए दाखिला प्रक्रिया का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस योजना के तहत राज्य के प्राइवेट स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें गरीब बच्चों के लिए आरक्षित रहती हैं और इन्हीं सीटों पर दाखिले की प्रक्रिया अब तय कार्यक्रम के अनुसार चलेगी।

नोटिफिकेशन जारी होने के बाद प्रदेश के कई जिलों—जैसे गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और करनाल—में अभिभावकों ने जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। वहीं कुछ अभिभावक संगठनों ने शिक्षा विभाग पर देरी से प्रक्रिया शुरू करने का आरोप लगाया है और कहा है कि इससे बच्चों को समय पर दाखिला मिलने में दिक्कत आ सकती है।

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11 मार्च से स्कूलों से मांगा जाएगा सीटों का ब्यौरा

शिक्षा विभाग के कार्यक्रम के मुताबिक 11 से 17 मार्च तक सभी निजी स्कूलों से आरटीई के तहत आरक्षित 25 प्रतिशत सीटों का क्लास-वाइज विवरण मांगा जाएगा। इसके बाद 18 से 24 मार्च तक विभाग इन सीटों के ब्यौरे की जांच करेगा ताकि वास्तविक रिक्त सीटों की सूची तैयार की जा सके।

यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद अभिभावकों के लिए आवेदन का पोर्टल खोला जाएगा। विभाग का कहना है कि इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि किस जिले और किस स्कूल में कितनी सीटें उपलब्ध हैं।

31 मार्च से शुरू होंगे बच्चों के आवेदन

विभाग ने तय किया है कि 31 मार्च से 7 अप्रैल तक आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के परिवार अपने बच्चों के लिए आवेदन कर सकेंगे। इसके बाद 9 अप्रैल को लॉटरी प्रणाली के जरिए बच्चों का चयन किया जाएगा ताकि सीटों का आवंटन पारदर्शी तरीके से हो सके।

चयन के बाद 10 अप्रैल से 23 अप्रैल तक बच्चों को अलग-अलग निजी स्कूलों में सीटें अलॉट की जाएंगी। इसके बाद 30 अप्रैल से 5 मई के बीच वेटिंग लिस्ट जारी की जाएगी, ताकि खाली रह जाने वाली सीटों पर अन्य बच्चों को मौका दिया जा सके।

नोटिफिकेशन की टाइमिंग पर उठा विवाद

अभिभावक एकता मंच का कहना है कि कई अन्य राज्यों ने आरटीई की प्रक्रिया जनवरी या फरवरी में ही शुरू कर दी थी। मंच के अनुसार महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में दाखिला प्रक्रिया 31 मार्च तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया था ताकि 1 अप्रैल से बच्चों की पढ़ाई शुरू हो सके।

मंच का आरोप है कि हरियाणा में देरी से नोटिफिकेशन जारी होने के कारण कई निजी स्कूलों में नियमित दाखिले पहले ही पूरे हो जाते हैं। ऐसे में बाद में चयनित आरटीई बच्चों को प्रवेश देने से स्कूल संचालक कई बार मना कर देते हैं।

पिछले सत्र में 28 स्कूलों पर लगे थे आरोप

मंच के प्रदेश लीगल एडवाइजर एडवोकेट BS Birdi ने बताया कि पिछले शिक्षा सत्र में सीबीएसई से जुड़े 28 निजी स्कूलों ने विभाग द्वारा चिन्हित गरीब बच्चों को प्रवेश देने से इनकार कर दिया था। इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी ने दो बार शिक्षा निदेशक पंचकुला को पत्र लिखकर इन स्कूलों की मान्यता रद्द करने की सिफारिश भी की थी।

मंच के राष्ट्रीय सलाहकार और वरिष्ठ अधिवक्ता Ashok Agarwal ने भी मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी। उनका कहना है कि यदि दोषी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो इस मुद्दे को लेकर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी।

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