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Sohna Anaj Mandi News: सोहना के किसानों की मौज! 54 साल बाद मिलेगी नई अनाज मंडी, कृषि मंत्री ने दिए निर्देश

AAmandeep Singh
सोहना के किसानों की मौज! 54 साल बाद मिलेगी नई अनाज मंडी, कृषि मंत्री ने दिए निर्देश
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गुरुग्राम।  हरियाणा के गुरुग्राम जिले के सोहना इलाके के किसानों के लिए एक सुखद खबर है। सोहना में पिछले लंबे समय से मंडी की तंग गलियों और जगह की कमी से जूझ रहे अन्नदाताओं की पुकार आखिरकार सरकार के कानों तक पहुँच गई है। प्रदेश सरकार ने सोहना में एक नई और विशाल अनाज मंडी के निर्माण का खाका तैयार किया है। इस कदम से न केवल मंडी में लगने वाले जाम से मुक्ति मिलेगी, बल्कि फसल की आवक के समय किसानों को अपनी उपज सड़कों पर या खुले आसमान के नीचे नहीं डालनी पड़ेगी।

कृषि मंत्री का कड़ा रुख: बोले- “जल्द ढूंढें जमीन, सुविधाओं में नहीं होगी कोताही”

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हाल ही में हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने सोहना अनाज मंडी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने मंडी में फैली अव्यवस्थाओं और जगह की किल्लत को खुद अपनी आंखों से देखा। किसानों और आढ़तियों ने मंत्री को बताया कि साल 1972 में बनी यह मंडी अब वर्तमान की भारी आवक को झेलने में सक्षम नहीं है। सीजन के समय हालात इतने बदतर हो जाते हैं कि फसल रखने की जगह नहीं बचती, जिससे खराब मौसम में किसानों का सोना (फसल) मिट्टी में मिल जाता है। मंत्री ने इन शिकायतों पर तुरंत संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को फटकार लगाई और जल्द से जल्द नई मंडी के लिए उपयुक्त भूमि का चयन कर रिपोर्ट सौंपने को कहा।

नई मंडी: डिजिटल इंडिया और हाईटेक सुविधाओं का मेल

सरकार जिस नई मंडी की योजना बना रही है, वह केवल चारदीवारी तक सीमित नहीं होगी। कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया है कि नई अनाज मंडी को पूरी तरह आधुनिक बनाया जाएगा। इसमें इलेक्ट्रॉनिक तौल प्रणाली (Electronic Weighing) के साथ-साथ डिजिटल भुगतान की व्यवस्था होगी ताकि किसानों को अपनी मेहनत की कमाई के लिए आढ़तियों के पीछे न घूमना पड़े। इसके अलावा, मंडी में बड़े और पक्के शेड, पर्याप्त पेयजल सुविधा, साफ-सफाई और किसानों के ठहरने के लिए किसान भवन जैसी सुविधाएं भी शामिल होंगी।

क्षेत्रीय विकास को मिलेगी नई रफ्तार

सोहना में नई मंडी बनने का असर केवल सोहना शहर तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नूंह, तावडू और गुरुग्राम के आसपास के ग्रामीण अंचलों के किसानों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा। मंडी में जगह ज्यादा होने से फसल खरीद की प्रक्रिया तेज होगी और समय पर लिफ्टिंग सुनिश्चित हो सकेगी। स्थानीय मार्गदर्शिका और विकास के नजरिए से भी यह प्रोजेक्ट बेहद अहम माना जा रहा है। सरकार के इस फैसले के बाद स्थानीय आढ़तियों और किसानों में खुशी की लहर है, क्योंकि वे पिछले कई सालों से इस मांग को लेकर सरकार के चक्कर काट रहे थे।

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