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Stubble Burning Haryana: हरियाणा में पराली जलाई तो सरकारी योजनाओं से धोना पड़ेगा हाथ, रेड एंट्री का आदेश जारी

AAmandeep Singh
हरियाणा में पराली जलाई तो सरकारी योजनाओं से धोना पड़ेगा हाथ, रेड एंट्री का आदेश जारी
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हरियाणा। सर्दियों की आहट के साथ ही दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे हरियाणा में स्मॉग का खतरा मंडराने लगा है। इसे देखते हुए हरियाणा सरकार ने पराली प्रबंधन को लेकर अपनी रणनीति बेहद आक्रामक कर दी है। भिवानी जिले सहित पूरे प्रदेश में प्रशासन को स्पष्ट निर्देश हैं कि समझाने का दौर अब खत्म हो चुका है और अब कार्रवाई का वक्त है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक, सरकार का मकसद किसानों को प्रताड़ित करना नहीं, बल्कि उन्हें पर्यावरण और जमीन की सेहत के प्रति गंभीर बनाना है।

इनाम भी और सजा भी: 1200 रुपये की मदद

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भिवानी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी शैलेंद्र कुमार ने बताया कि सरकार ‘कैरट एंड स्टिक’ (पुरस्कार और दंड) की नीति पर चल रही है। एक तरफ जहां पराली जलाने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान है, वहीं दूसरी तरफ जो किसान पराली का सही निस्तारण कर रहे हैं, उन्हें 1200 रुपये प्रति एकड़ की आर्थिक सहायता दी जा रही है। विभाग का मानना है कि यह राशि किसानों को मशीनरी के इस्तेमाल और प्रबंधन के खर्च में मदद करेगी।

सैटेलाइट की तीसरी आंख से बचना मुश्किल

अब किसान यह सोचकर आग नहीं लगा सकते कि उन्हें कोई देख नहीं रहा है। शैलेंद्र कुमार ने बताया कि सैटेलाइट के माध्यम से सीधे मुख्यालय से लोकेशन ट्रेस की जा रही है। भिवानी में अब तक 74 ऐसे हॉटस्पॉट मिले हैं जहां आग लगने की संभावना जताई गई थी। टीम ने जब मौके पर जाकर वेरिफिकेशन किया, तो 19 जगहों पर पराली जलती पाई गई। इनमें से 18 मामलों में पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के लिए पत्र लिख दिया गया है।

जमीन की ‘कोख’ जला रहे हैं किसान

सिर्फ प्रदूषण ही नहीं, बल्कि जमीन की उपजाऊ शक्ति को लेकर भी कृषि विशेषज्ञ चिंतित हैं। अधिकारियों और जागरूक किसानों का कहना है कि आग लगाने से मिट्टी में मौजूद मित्र कीट और केंचुए मर जाते हैं। भिवानी के किसान सतबीर और अनिल ने माना कि पराली जलाने से अगली फसल के अंकुरण में दिक्कत आती है और खाद का खर्चा बढ़ जाता है। सरकार अब गांव स्तर पर पटवारियों, कानूनगो और सरपंचों की कमेटियां बनाकर किसानों को यह समझाने की कोशिश कर रही है कि पराली को जलाएं नहीं, बल्कि उसे खाद में बदलें।

प्रशासन की चौकसी: बस स्टैंड से मंडियों तक पहरा

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और कृषि विभाग ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाल लिया है। अनाज मंडियों, रेलवे स्टेशनों और बस स्टैंडों पर बड़े-बड़े बैनर लगाकर किसानों को रेड एंट्री के खतरों के प्रति आगाह किया जा रहा है। अधिकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि एक बार रिकॉर्ड में रेड एंट्री हो गई, तो खाद, बीज या कृषि यंत्रों पर मिलने वाली किसी भी तरह की सब्सिडी मिलना नामुमकिन हो जाएगा।

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