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Haryana Sunflower MSP: किसानों को राहत, आढ़तियों को झटका; हरियाणा के खाद्य मंत्री ने सूरजमुखी की आढ़त बढ़ाने से किया साफ इंकार

AAmandeep Singh
Haryana Sunflower MSP: किसानों को राहत, आढ़तियों को झटका; हरियाणा के खाद्य मंत्री ने सूरजमुखी की आढ़त बढ़ाने से किया साफ इंकार
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हरियाणा। हरियाणा के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। पिछले कई दिनों से सूरजमुखी की खरीद से दूरी बना रहे आढ़तियों के दबाव के आगे झुकने से सरकार ने साफ इनकार कर दिया है। चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री राजेश नागर ने दोटूक कहा कि आढ़तियों को एक प्रतिशत कमीशन की दर पर ही सूरजमुखी की खरीद करनी होगी। सरकार के इस कड़े संदेश ने मंडियों में आढ़त बढ़ाने को लेकर चल रही लॉबिंग को शांत कर दिया है। मंत्री ने तर्क दिया कि आढ़त का ढांचा केंद्र सरकार द्वारा तय किया जाता है और राज्य सरकार अपनी तरफ से इसमें कोई बदलाव नहीं कर सकती।

आढ़त एसोसिएशन की दलील: ’70 रुपये में मजदूरी और खर्च निकालना नामुमकिन’

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दूसरी ओर, आढ़ती इस सरकारी फैसले से नाखुश हैं और अपनी मजबूरियां गिना रहे हैं। हरियाणा राज्य अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राम अवतार तायल का कहना है कि मौजूदा एक प्रतिशत आढ़त के हिसाब से उन्हें प्रति क्विंटल महज 70 रुपये के आसपास बचते हैं। इस महंगाई के दौर में इतनी कम रकम में लेबर (मजदूरी), बारदाना संभालना और मंडी के दूसरे प्रशासनिक खर्चे निकालना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। एसोसिएशन का दावा था कि अगर सरकार ढाई प्रतिशत आढ़त देती, तो यह राशि बढ़कर 182 रुपये प्रति क्विंटल हो जाती, जिससे वे सुचारू रूप से काम कर पाते। यही वजह थी कि कुरुक्षेत्र और अंबाला जैसी बड़ी मंडियों में आढ़तियों ने हाथ पीछे खींच लिए थे।

किसान संगठनों की लामबंदी के बाद जागा प्रशासन, बरवाला में खुला खाता

मंडियों में फसल आने के बावजूद खरीद शुरू न होने से प्रदेश के किसान संगठनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलना शुरू कर दिया था। किसानों के बढ़ते गुस्से और लामबंदी को देखते हुए प्रशासनिक अमला तुरंत हरकत में आया। सरकार की सख्ती का असर यह हुआ कि पंचकूला की बरवाला मंडी में चार किसानों की 11.82 मीट्रिक टन सूरजमुखी की पहली आधिकारिक खरीद दर्ज की गई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक सूबे के चार प्रमुख उत्पादक जिलों की 13 मंडियों में 1320.30 मीट्रिक टन सूरजमुखी की आवक हो चुकी है, जिसमें अकेले वीरवार को ही किसान 789.95 मीट्रिक टन फसल लेकर क्रय केंद्रों पर पहुंचे थे।

कुरुक्षेत्र और अंबाला में सबसे ज्यादा आवक, भावांतर पर भी नजर

फिलहाल जो मंडियों की स्थिति है, उसके मुताबिक सबसे ज्यादा सूरजमुखी कुरुक्षेत्र (505.87 मीट्रिक टन), पंचकूला (473.60 मीट्रिक टन) और अंबाला (323.19 मीट्रिक टन) की मंडियों में डंप है। यमुनानगर में भी अभी तक करीब 17.73 मीट्रिक टन फसल आ चुकी है। किसानों के लिए अच्छी बात यह है कि इस बार उन्हें ₹7,721 प्रति क्विंटल का रिकॉर्ड एमएसपी मिल रहा है, जो पिछले साल के ₹7,280 से काफी बेहतर है। इसके साथ ही, किसानों की सहूलियत के लिए भावांतर भरपाई योजना से जुड़े कुछ तकनीकी पहलुओं को भी सरकार के संज्ञान में लाया गया है, जिस पर जल्द ही फैसला होने की उम्मीद है ताकि किसानों की जेब पर कोई अतिरिक्त बोझ न पड़े।

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