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Haryana Industrial Policy: हरियाणा में अवैध इंडस्ट्रियल एरिया होंगे नियमित, कैबिनेट ने मंजूर किए कड़े नियम

AAmandeep Singh
Haryana Industrial Policy: हरियाणा में अवैध इंडस्ट्रियल एरिया होंगे नियमित, कैबिनेट ने मंजूर किए कड़े नियम
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हरियाणा। हरियाणा में बिना आधिकारिक मंजूरी के चल रहे अनधिकृत औद्योगिक क्षेत्रों के दिन अब बहुरने वाले हैं। प्रदेश सरकार ने उद्योग जगत को एक बड़ी राहत देते हुए इन अवैध इंडस्ट्रियल क्लस्टरों को नियमित करने की नीति पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस संवेदनशील और लंबे समय से लटके मुद्दे को सुलझाने के लिए विधायी संशोधन को पास किया गया। सरकार के इस कदम से राज्य के हजारों छोटे और मध्यम दर्जे के कारखानों को स्थायी कानूनी दर्जा मिल सकेगा, जो अब तक सरकारी कार्रवाई के डर के साए में चल रहे थे।

कानून में हुआ बड़ा फेरबदल, रिहायशी कॉलोनियों की तर्ज पर बचेंगे कारखाने

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इस व्यवस्था को धरातल पर उतारने के लिए सरकार ने ‘हरियाणा मैनेजमेंट ऑफ सिविक अमेनिटीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेफिशिएंट एरिया आउटसाइड म्यूनिसिपल एरिया (स्पेशल प्रोविजंस) अधिनियम’ में बड़ा संशोधन किया है। अब तक यह कानून केवल अवैध रिहायशी कॉलोनियों को मूलभूत सुविधाएं देने और उन्हें वैध करने तक सीमित था। लेकिन अब इसके दायरे में औद्योगिक क्षेत्रों को भी शामिल कर लिया गया है। इस विधायी बदलाव का सीधा फायदा उन उद्यमियों को मिलेगा जिनकी फैक्ट्रियां दशकों से चल रही हैं लेकिन तकनीकी कमियों के कारण उन्हें ‘अवैध’ की श्रेणी में रखा गया था।

शर्तें भी सख्त: हर क्लस्टर को पास करनी होगी 10 एकड़ की परीक्षा

सरकार ने राहत का रास्ता तो खोला है, लेकिन इसके साथ ही कुछ कड़े मानदंड भी तय कर दिए हैं ताकि भविष्य में इस नीति का गलत फायदा न उठाया जा सके। तय नियमों के मुताबिक:

एरिया लिमिट: केवल उन्हीं औद्योगिक क्षेत्रों को नियमितीकरण के योग्य माना जाएगा जो कम से कम 10 एकड़ के निरंतर (कंटीन्यूअस) भूभाग में फैले हों।

यूनिट्स की संख्या: उस तय 10 एकड़ के दायरे में कम से कम 50 सक्रिय औद्योगिक इकाइयों का चलना अनिवार्य है।

कट-ऑफ डेट का पेंच: इस योजना का लाभ केवल उन्हीं निर्माणों को मिलेगा जो सरकार द्वारा तय की जाने वाली कट-ऑफ तारीख से पहले वजूद में आ चुके थे। इसके बाद खड़े किए गए किसी भी नए अवैध ढांचे को बख्शा नहीं जाएगा।

फरीदाबाद के इन इलाकों की बदलेगी किस्मत, दूर होगी उद्यमियों की चिंता

इस नीति का सबसे व्यापक और सीधा असर औद्योगिक नगरी फरीदाबाद पर पड़ने जा रहा है। यहां के नवीन नगर, सुरूरपुर, धीरज नगर, मेवला महाराजपुर, सेक्टर-56 और 58 के आसपास के क्षेत्र तथा आईएमटी फरीदाबाद से सटी दर्जनों कॉलोनियों में छोटे-छोटे कारखाने बिना वैध औद्योगिक दर्जे के चल रहे हैं।

एसोसिएशन का पक्ष: डीएलएफ इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रधान राम अग्रवाल और आईएमटी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष हेमंत शर्मा ने सरकार के इस फैसले को ऐतिहासिक बताया है। उनका कहना है कि इस फैसले से उद्योगपतियों को न केवल सीलिंग और पेनल्टी के खौफ से मुक्ति मिलेगी, बल्कि जब ये इलाके नियमित होंगे तो सरकार को भी करोड़ों रुपये का नया राजस्व (टैक्स) मिलेगा। बुनियादी ढांचा सुधरने से यहां रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

दलालों और अफसरों के चक्करों से मुक्ति, ऑनलाइन पोर्टल संभालेगा कमान

अधिकारियों की मनमानी और फाइलों को अटकाने के खेल पर लगाम कसने के लिए सरकार ने इस पूरी कवायद को पूरी तरह डिजिटल करने का फैसला किया है। इसके लिए एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया जाएगा, जहां कोई भी उद्योगपति या उनकी स्थानीय एसोसिएशन सीधे रेगुलराइजेशन के लिए आवेदन कर सकेगी। प्रक्रिया पारदर्शी होने से भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म होगी। सबसे बड़ी बात यह है कि एक बार इलाका नियमित होने के बाद इन फैक्ट्रियों को वैध बिजली कनेक्शन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी (EE-A-T मानदंडों के तहत) और बैंकों से बिजनेस लोन मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा।

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