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Electricity from Garbage: हरियाणा में कचरे से बनेगी बिजली: गुरुग्राम और फरीदाबाद समेत 5 शहरों में लगेंगे हाईटेक प्लांट

AAmandeep Singh
हरियाणा में कचरे से बनेगी बिजली: गुरुग्राम और फरीदाबाद समेत 5 शहरों में लगेंगे हाईटेक प्लांट
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हरियाणा। हरियाणा के महानगरों में गले की फांस बन चुके कचरे के ढेरों से अब बिजली पैदा की जाएगी। स्वच्छ भारत मिशन के अगले चरण में कदम बढ़ाते हुए राज्य सरकार ने हिसार, गुरुग्राम, फरीदाबाद, करनाल और पंचकूला में अत्याधुनिक ‘वेस्ट-टू-एनर्जी’ (WTE) प्लांट स्थापित करने का निर्णय लिया है। यह परियोजना न केवल शहरों की सफाई व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी, बल्कि प्रदेश के ऊर्जा कोटे में स्वच्छ बिजली का इजाफा भी करेगी। शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय ने इस प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए कमर कस ली है और इसे समयबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

20 दिन की डेडलाइन: 5 IAS अधिकारियों के कंधों पर जिम्मेदारी

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प्रदेश के इतिहास में संभवतः यह पहली बार है जब किसी सिंगल प्रोजेक्ट के लिए 5 वरिष्ठ IAS अधिकारियों की कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी को महज 20 दिनों के भीतर अपनी फिजिबिलिटी रिपोर्ट और मॉडल ड्राफ्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट में पांच मुख्य पहलुओं पर फोकस रहेगा: पांचों जिलों में प्रतिदिन निकलने वाले कचरे की सटीक मात्रा, प्लांट के लिए उपयुक्त जमीन का चयन, ग्रिड तक बिजली पहुँचाने का बुनियादी ढांचा, पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) और सबसे महत्वपूर्ण—पर्यावरणीय प्रभाव का विस्तृत अध्ययन। सरकार चाहती है कि इन प्लांटों में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल हो जिससे प्रदूषण का स्तर शून्य के करीब रहे।

कूड़े के पहाड़ों से मिलेगी मुक्ति, थम जाएंगी डंपिंग यार्ड की आग

गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे शहरों के लिए कचरा प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन चुका है। आंकड़ों के मुताबिक, फरीदाबाद से रोजाना 800 से 900 मीट्रिक टन और गुरुग्राम से करीब 1200 मीट्रिक टन ठोस कचरा निकलता है। वर्तमान में यह कचरा लैंडफिल साइटों पर जमा होता रहता है, जहाँ अक्सर मीथेन गैस के कारण आग लगने की घटनाएं होती हैं। इन प्लांटों के चालू होने के बाद रोजाना हजारों टन कचरे को प्रोसेस किया जाएगा, जिससे बंधवाड़ी जैसे डंपिंग यार्डों पर दबाव कम होगा और आसपास रहने वाले लोगों को जहरीले धुएं व बदबू से राहत मिलेगी।

स्वच्छ ऊर्जा का नया विकल्प: स्थानीय ग्रिड को मिलेगी बिजली

इन प्लांटों का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के साथ-साथ बिजली का उत्पादन भी होगा। तैयार की गई बिजली को सीधे स्थानीय पावर ग्रिड में सप्लाई किया जाएगा, जिससे शहरों की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रोजेक्ट ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ का बेहतरीन उदाहरण साबित होगा, जहाँ वेस्ट को वेल्थ (संपदा) में बदला जा रहा है। सरकार का यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण तैयार करने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।

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