Haryana Weather: उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में अक्टूबर महीने के बीच मौसम ने अचानक करवट ली है। हरियाणा के कई हिस्सों में हाल ही में हुई बारिश के बाद ठंडी हवाओं का अहसास होने लगा है। मौसम विभाग ने ताजा अपडेट जारी करते हुए राज्य में आगामी 15 अक्टूबर तक बारिश की गतिविधियां सक्रिय रहने की संभावना जताई है। खासकर मंगलवार, 13 अक्टूबर को उत्तरी हरियाणा के कुछ जिलों में मौसम का मिजाज ज्यादा सख्त रहने के आसार हैं।
सोमवार को राज्य के जींद, सोनीपत, गुरुग्राम और रेवाड़ी समेत कई इलाकों में झमाझम या हल्की बौछारें गिरी थीं। इन इलाकों में बादलों की आवाजाही के बीच तापमान में भी बदलाव दर्ज किया गया। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस पश्चिमी विक्षोभ या स्थानीय मौसम तंत्र के असर से तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिससे लोगों को गर्मी से तो राहत मिली है, लेकिन किसानों की चिंताएं थोड़ी बढ़ गई हैं।
40 से 50 किलोमीटर की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
मौसम विभाग की चेतावनी के मुताबिक, मंगलवार को कुरुक्षेत्र और कैथल जिलों में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। यहाँ गरज-चमक के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान जताया गया है। इसके अलावा पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, करनाल, सिरसा, फतेहाबाद, हिसार और जींद में भी कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश हो सकती है।
मौसम में आए इस अचानक बदलाव का असर तापमान पर भी साफ नजर आ रहा है। हालाँकि 12 अक्टूबर की मौसम रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा के औसत अधिकतम तापमान में पिछले दिन की तुलना में 1.5 डिग्री सेल्सियस की हल्की बढ़ोतरी जरूर दर्ज की गई है, लेकिन इसके बावजूद यह सामान्य से औसतन 2.9 डिग्री सेल्सियस नीचे बना हुआ है। वर्तमान में महेंद्रगढ़ का अधिकतम तापमान 33.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे ज्यादा रहा।
14 और 15 अक्टूबर को भी बरसेंगे बादल, किसानों को विशेष सावधानी की सलाह
राहत का यह दौर अभी थमता नहीं दिख रहा है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 14 और 15 अक्टूबर को भी हरियाणा के कई हिस्सों में बादलों का डेरा रहेगा और हल्की से मध्यम बारिश होने की पूरी संभावना है। इस दौरान कई जगहों पर तेज हवाएं चलने के साथ गरज-चमक की गतिविधियां भी देखने को मिल सकती हैं।
इस बदलते मौसम को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों और मौसम विभाग ने किसानों के साथ-साथ आम जनता को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। तेज हवाओं और वज्रपात की आशंका के बीच खुले खेतों या पेड़ों के नीचे जाने से बचने की अपील की गई है ताकि किसी भी तरह के नुकसान से बचा जा सके।
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