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Haryana Wheat Crop News: हरियाणा के खेतों में बरसा 'सोना', गेहूं की फसल के लिए संजीवनी बनी बेमौसम बारिश

AAmandeep Singh
हरियाणा के खेतों में बरसा 'सोना', गेहूं की फसल के लिए संजीवनी बनी बेमौसम बारिश
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हरियाणा। फरवरी और मार्च की शुरुआत में जिस तरह सूरज की तपिश बढ़ रही थी, उसने हरियाणा के अन्नदाता की चिंताएं बढ़ा दी थीं। डर था कि कहीं समय से पहले गर्मी पड़ने से गेहूं की बाली सूख न जाए, लेकिन हालिया पश्चिमी विक्षोभ ने पूरा समीकरण ही बदल दिया है। करनाल स्थित भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR) के विशेषज्ञों का कहना है कि यह बारिश गेहूं की फसल के लिए ‘सोने पर सुहागा’ साबित हुई है। भले ही कुछ इलाकों में ओलावृष्टि से आंशिक नुकसान की खबरें आई हों, लेकिन ओवरऑल यह मौसम पैदावार के लिहाज से वरदान बनकर आया है।

दाने की क्वालिटी और वजन में होगा इजाफा

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डॉ. रतन तिवारी, निदेशक (राष्ट्रीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान), ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण साझा करते हुए बताया कि गेहूं एक ऐसी फसल है जिसे पकने के अंतिम दौर में ठंडे वातावरण की जरूरत होती है। वर्तमान में फसल ‘मिल्किंग स्टेज’ यानी दाना भरने की अवस्था में है। अगर इस समय तापमान 35 डिग्री के पार चला जाता, तो दाना सिकुड़ जाता और वजन कम रह जाता। अब बारिश के कारण आए तापमान में गिरावट से दाने का विकास बेहतर होगा, जिससे प्रति एकड़ उत्पादन में बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। यह ठंडा मौसम फसल की गुणवत्ता और चमक, दोनों को निखारेगा।

किसानों के लिए ‘अलर्ट’: पानी जमा हुआ तो बढ़ सकती है मुश्किल

जहां एक तरफ बारिश को फायदेमंद बताया जा रहा है, वहीं कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को एक जरूरी हिदायत भी दी है। डॉ. तिवारी ने स्पष्ट किया कि गेहूं को नमी तो चाहिए, लेकिन जड़ों में खड़ा पानी इसके लिए जहर समान है। जिन खेतों में बारिश का पानी जमा हो गया है, वहां से तत्काल निकासी का प्रबंध करना अनिवार्य है। लंबे समय तक जलभराव रहने से पौधों को पीलापन घेर सकता है और जड़े कमजोर होकर फसल गिर सकती है (Lodging)। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अब खेतों में सिंचाई न करें और कुदरती नमी का लाभ उठाएं।

रिकॉर्ड पैदावार की ओर हरियाणा

कृषि विभाग के शुरुआती अनुमानों की मानें तो इस बार हरियाणा में गेहूं का उत्पादन पिछले कई सालों के मुकाबले बेहतर रहने वाला है। मिट्टी में पर्याप्त नमी और अनुकूल तापमान ने बंपर पैदावार की उम्मीदें जगा दी हैं। यदि आने वाले 10-15 दिनों तक मौसम इसी तरह सामान्य बना रहता है और तेज गर्म हवाएं (लू) नहीं चलती हैं, तो मंडियों में गेहूं की आवक इस बार नया इतिहास रच सकती है। फिलहाल, खेतों में लहलहाती हरी-भरी फसल को देखकर किसानों के माथे से चिंता की लकीरें गायब होती दिख रही हैं।

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