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Haryana News: नगर निगमों में 'वर्क स्लिप' के नाम पर महालूट, कागजों पर हुआ विकास, हकीकत में गायब!

AAmandeep Singh
नगर निगमों में 'वर्क स्लिप' के नाम पर महालूट, कागजों पर हुआ विकास, हकीकत में गायब!
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हरियाणा। हरियाणा के प्रशासनिक गलियारों में आज की सुबह भारी बेचैनी और तनाव के साथ शुरू हुई है। प्रदेश के बहुचर्चित ‘वर्क स्लिप घोटाले’ (Work Slip Scam) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट आज सरकार की मेज पर पहुंचने वाली है। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की सीधी निगरानी में तैयार हुई इस रिपोर्ट में उन चेहरों को बेनकाब किए जाने की संभावना है, जिन्होंने सरकारी खजाने को ‘वर्क स्लिप’ के नाम पर दीमक की तरह चाटा है। सूत्रों की मानें तो इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होते ही कई आईएएस (IAS), एचसीएस (HCS) और तकनीकी अधिकारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।

क्या है ‘वर्क स्लिप’ का मायाजाल? कैसे हुआ करोड़ों का खेल

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आमतौर पर सरकारी विभागों में किसी भी निर्माण कार्य के लिए एक पारदर्शी ई-टेंडरिंग प्रक्रिया अपनाई जाती है। लेकिन इस घोटाले के ‘मास्टरमाइंड्स’ ने नियमों की फांस से बचने के लिए ‘वर्क स्लिप’ को अपना हथियार बनाया। नियम कहते हैं कि बेहद जरूरी या छोटे कार्यों के लिए वर्क स्लिप का सहारा लिया जा सकता है, लेकिन भ्रष्टाचार के इस खेल में करोड़ों रुपये के बड़े प्रोजेक्ट्स को जानबूझकर छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट दिया गया।

जांच में जो सबसे चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है, वह है ‘कागजी विकास’। कई नगर निगमों और परिषदों में फाइलें तो दौड़ती रहीं, वर्क स्लिप जारी हुईं और ठेकेदारों को करोड़ों का भुगतान भी हो गया, लेकिन जब जांच टीमें मौके पर पहुंचीं तो वहां विकास के नाम पर एक ईंट तक नहीं लगी थी। कहीं-कहीं तो एक ही सड़क या नाले की मरम्मत के लिए दो-दो बार वर्क स्लिप जारी कर सरकारी तिजोरी में दोहरा सेंध लगाया गया।

सिर्फ जेइ (JE) नहीं, ‘साहबों’ तक पहुंची जांच की आंच

अक्सर ऐसे घोटालों में निचले स्तर के कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाकर बड़े अधिकारी बच निकलते हैं, लेकिन इस बार हवा का रुख बदला हुआ है। विजिलेंस और मुख्यमंत्री की विशेष टीम की रडार पर इस बार नगर आयुक्त (Commissioners), जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (DDPO) और कार्यकारी अभियंता (XEN) स्तर के अधिकारी हैं। सूत्रों का दावा है कि जांच रिपोर्ट में उन ‘रिटायर्ड’ अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं, जो अपने कार्यकाल के दौरान इस घोटाले की मलाई खाते रहे और अब चैन की नींद सो रहे थे।

‘जीरो टॉलरेंस’ की अग्निपरीक्षा: बख्शे नहीं जाएंगे रसूखदार

भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ का नारा देने वाली नायब सैनी सरकार के लिए यह रिपोर्ट एक बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होने वाली है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने साफ संकेत दिए हैं कि रिपोर्ट के आधार पर न केवल निलंबन (Suspension) की कार्रवाई होगी, बल्कि गंभीर मामलों में एफआईआर (FIR) दर्ज कर रिकवरी के आदेश भी दिए जा सकते हैं।

आज दोपहर बाद जब यह रिपोर्ट आधिकारिक तौर पर मुख्यमंत्री को सौंपी जाएगी, तब स्पष्ट होगा कि हरियाणा के प्रशासनिक कुनबे में कितने ‘सफेदपोश’ दागी निकलते हैं। फिलहाल, चंडीगढ़ से लेकर गुरुग्राम और फरीदाबाद के निगम कार्यालयों तक सन्नाटा पसरा हुआ है और अधिकारियों की नजरें केवल सचिवालय से आने वाली अगली बड़ी खबर पर टिकी हैं।

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