Breaking News
Magha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं कियाMagha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं किया

HAU Hisar Krishi Mela: हिसार HAU में खरीफ मेले का शंखनाद: हरियाणा के किसानों को मिलेगी नई तकनीक की सौगात

AAmandeep Singh
हिसार HAU में खरीफ मेले का शंखनाद: हरियाणा के किसानों को मिलेगी नई तकनीक की सौगात
शेयर करें
AI Quick Summary

Want to save time? Let our AI read the article and give you 3 quick bullet points.

Listen to this article
AUDIO VERSION

हिसार। हिसार की पहचान बन चुकी चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) एक बार फिर उत्तर भारत के किसानों के जमावड़े के लिए तैयार है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आगामी 23 और 24 मार्च को दो दिवसीय ‘खरीफ कृषि मेला’ आयोजित करने का फैसला लिया है। यह मेला केवल हरियाणा ही नहीं, बल्कि राजस्थान, पंजाब और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों के किसानों के लिए भी ज्ञान का बड़ा केंद्र साबित होगा। मेले का मुख्य फोकस खरीफ सीजन की फसलों, विशेषकर धान, कपास और बाजरे की पैदावार बढ़ाने और लागत कम करने पर रहेगा।

सीधी बात वैज्ञानिकों के साथ: खेत की बीमारियों का मिलेगा पक्का इलाज

विज्ञापन

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बलदेव राज कंबोज ने साफ किया कि इस बार मेले का स्वरूप बेहद व्यावहारिक रखा गया है। प्रदर्शनी में केवल पोस्टर नहीं, बल्कि खेतों में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक तकनीकों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का लाइव डेमो दिया जाएगा। विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. रमेश कुमार के अनुसार, मेले का सबसे अहम हिस्सा ‘वैज्ञानिक-किसान संवाद’ होगा। इसमें किसान सीधे विशेषज्ञों के सामने अपनी मिट्टी की सेहत, कीटों के हमले और फसलों के रोगों से जुड़े सवाल रख सकेंगे। अक्सर देखा जाता है कि जानकारी के अभाव में किसान गलत कीटनाशकों का प्रयोग करते हैं, जिससे लागत बढ़ती है, इसी गैप को यह मेला खत्म करेगा।

नई किस्मों के बीज और सब्सिडी की जानकारी एक ही छत के नीचे

मेले के दौरान एग्रो-इंडस्ट्रियल प्रदर्शनी का भी भव्य आयोजन होगा। सह-निदेशक कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि स्टॉल बुकिंग की प्रक्रिया जल्द शुरू होने वाली है। यहाँ न केवल यूनिवर्सिटी द्वारा तैयार की गई नई बीज किस्में दिखाई जाएंगी, बल्कि निजी कंपनियां भी अपने कृषि यंत्रों का प्रदर्शन करेंगी। खास बात यह है कि इस दौरान कृषि विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे, जो किसानों को कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी और अन्य लाभकारी योजनाओं के बारे में विस्तार से बताएंगे।

पशुपालन और बागवानी पर भी रहेगा विशेष जोर

यह मेला सिर्फ फसलों तक सीमित नहीं है। विश्वविद्यालय परिसर में पशुपालन, मधुमक्खी पालन और बागवानी से संबंधित विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे। बदलती जलवायु और घटते भूजल स्तर को देखते हुए ‘जल संरक्षण’ और ‘मृदा स्वास्थ्य’ पर विशेष जोर दिया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रदेशभर के किसानों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में हिसार पहुंचकर इस तकनीकी महाकुंभ का लाभ उठाएं। सुबह से शाम तक चलने वाले इस आयोजन में खेती को फायदे का सौदा बनाने के हर गुरु सिखाए जाएंगे।

विज्ञापन

हिसार की और ख़बरें

ताज़ा ख़बरें सीधे अपने ईमेल पर

जगमार्ग न्यूज़ की बड़ी ख़बरें रोज़ अपने इनबॉक्स में पाएं। मुफ़्त, कभी भी अनसब्सक्राइब करें।