October 2, 2026

HAU Hisar Kisan Mela: हिसार किसान मेले में ‘बाहुबली’ खीरे का जलवा, 4 किलो का खीरा और 1.5 किलो का नींबू देख हैरान हुए लोग

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HAU Hisar Kisan Mela: हिसार किसान मेले में 'बाहुबली' खीरे का जलवा, 4 किलो का खीरा और 1.5 किलो का नींबू देख हैरान हुए लोग

हिसार किसान मेले में 'बाहुबली' खीरे का जलवा, 4 किलो का खीरा और 1.5 किलो का नींबू देख हैरान हुए लोग

HAU Hisar Kisan Mela: चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU), हिसार के प्रांगण में आयोजित विशाल किसान मेला इस बार केवल खेती-किसानी की आधुनिक मशीनरियों तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों के व्यक्तिगत नवाचारों और अनोखी उपज का बड़ा मंच बन गया है। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे प्रगतिशील किसानों की मेहनत और प्रयोगों ने इस मेले में नया रंग भर दिया है।

मेले के दौरान सबसे ज्यादा भीड़ सोलापुर (महाराष्ट्र) से आए किसान दंपती अनिल गवली और उनकी पत्नी जीनल गवली के स्टॉल पर देखने को मिल रही है, जहां रखा विशालकाय ‘बाहुबली’ खीरा और एक-डेढ़ किलो वजनी नींबू देखकर हर कोई हैरान है।

5 एकड़ में देसी बीजों की क्रांति: 4 किलो का खीरा और औषधीय गुणों वाला बड़ा नींबू

महाराष्ट्र से पहुंचे किसान अनिल गवली ने बताया कि बारिश के मौसम में उगाई जाने वाली उनके खेत की विशेष प्रजाति का एक-एक खीरा 3 से लेकर 5 किलोग्राम तक वजनी होता है। गवली दंपती करीब 5 एकड़ में जैविक तरीके से खेती करते हैं और मिर्च, बैंगन, केला व सब्जियों की विभिन्न देसी किस्मों के बीज खुद तैयार कर अन्य किसानों तक पहुंचा रहे हैं।

वहीं उनकी पत्नी जीनल गवली ने डेढ़ किलो तक के बड़े नींबू की खासियत बताते हुए कहा कि प्राचीन काल में बुजुर्ग इस तरह के नींबू का उपयोग गुर्दे की पथरी के घरेलू इलाज के लिए किया करते थे। उनका मकसद किसानों को बीजों के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है ताकि उन्हें बाजार के महंगे और रसायनों से भरे बीजों पर निर्भर न रहना पड़े।

कीकर की फली का अचार और आंवले के लड्डू बने आकर्षण

मेले में स्थानीय और पारंपरिक व्यंजनों का नया रूप भी देखने को मिला। हिसार के निवासी धर्मवीर ने अपने स्टॉल पर कीकर की फली का अचार, बांस का अचार, हल्दी-अदरक का चटपटा मिश्रण और आंवले के पौष्टिक लड्डू प्रदर्शित किए। धर्मवीर का कहना है कि जिस कीकर की फली को अमूमन लोग बेकार समझकर छोड़ देते हैं, उससे पारंपरिक और स्वास्थ्यवर्धक अचार तैयार कर उन्होंने बाजार में एक नई मिसाल पेश की है। उनके स्टॉल पर लोग जमकर खरीदारी करते दिखे।

मशरूम उत्पादन और केंचुआ खाद से आत्मनिर्भरता की राह

फसलों के विविधीकरण (Crop Diversification) को बढ़ावा देने के लिए राजस्थान से आए किसान राजेश ने मशरूम की वैज्ञानिक खेती के गुर सिखाए। उन्होंने नियंत्रित तापमान और नमी के सही प्रबंधन के साथ कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने के मॉडल को किसानों के सामने रखा।

इसके साथ ही मेले में पहुंचे वर्मीकंपोस्ट (केंचुआ खाद) उत्पादकों के स्टॉलों पर भी किसानों ने गहरा रुझान दिखाया। रसायनिक खादों से बंजर होती जमीन को बचाने के लिए गेहूं, फल और सब्जियों में केंचुआ खाद के इस्तेमाल की बारीकियों को किसानों ने समझा।

कई राज्यों के किसानों का लगा तांता

एचएयू के इस तीन दिवसीय किसान मेले में हरियाणा के कोने-कोने के अलावा पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, चंडीगढ़ और महाराष्ट्र से हजारों की संख्या में किसान पहुंचे हैं। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों के सीधे संवाद ने इस मेले को ज्ञान और नवाचार का अनूठा केंद्र बना दिया है।

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