Health tips: नियमित रूप से व्यायाम करना शरीर की मांसपेशियों को मजबूत बनाने और मोबिलिटी सुधारने के लिए बेहद जरूरी है। लेकिन, जब वर्कआउट में जरूरत से ज्यादा भारी वजन, गलत तकनीक या शरीर की क्षमता से अधिक मेहनत शामिल हो जाती है, तो यही फिटनेस रूटीन रीढ़ की हड्डी के लिए मुसीबत बन जाता है। एक्सरसाइज के दौरान स्पाइन को सुरक्षित रखने के लिए सही पोस्चर और पूरी शारीरिक तैयारी का होना बहुत जरूरी है। थोड़ी सी भी लापरवाही पीठ दर्द, साइटिका या स्लिप्ड डिस्क जैसी गंभीर और पुरानी समस्याओं को न्योता दे सकती है।
मुंबई के सैफी अस्पताल में सलाहकार स्पाइन सर्जन डॉ. अमित शर्मा का साफ कहना है कि जिम वर्कआउट के दौरान गलत तरीकों से एक्सरसाइज करने से रीढ़ की हड्डी पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। डेडलिफ्ट, स्क्वैट्स, ओवरहेड प्रेस और अन्य हैवी लिफ्टिंग एक्सरसाइज अगर बिना सही तकनीक के की जाएं, तो स्पाइन इंजुरी का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
डेडलिफ्ट में फॉर्म की अनदेखी है खतरनाक
डेडलिफ्ट एक ऐसी फुल-बॉडी एक्सरसाइज है, जिसमें पीठ और हिप्स को सपोर्ट करने वाले कई मसल ग्रुप एक साथ काम करते हैं। हालांकि, बिना सही स्पाइनल अलाइनमेंट के भारी वजन उठाने से रीढ़ की हड्डी पर भयंकर मैकेनिकल स्ट्रेस बढ़ जाता है। बहुत तेजी से रिपीटिशन करना, वजन के दबाव में पीठ को गोल होने देना या अपनी क्षमता से ज्यादा वजन उठाने की जिद करना चोट के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि डेडलिफ्ट खतरनाक है; सही तकनीक, उचित लोड और प्रोग्रेसिव अप्रोच के साथ इसे पूरी तरह सुरक्षित तरीके से किया जा सकता है।
कई बार लोग सही तकनीक सीखने के बजाय केवल वजन बढ़ाने और आंकड़े दिखाने पर फोकस करते हैं। बिना पर्याप्त तैयारी या धीरे-धीरे वजन बढ़ाने की प्रक्रिया के सीधे भारी-भरकम बोझ उठाने की कोशिश करने से पीठ पर असहनीय दबाव पड़ता है। इसके अलावा, जिम में मिलने वाली लिफ्टिंग बेल्ट भी इस बात की गारंटी नहीं देती कि आपकी गलत तकनीक से स्पाइन सुरक्षित रहेगी।
वजन उठाते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां
जिम के दौरान वजन उठाते समय शरीर को अचानक मोड़ना या झटके देना सबसे आम और खतरनाक गलतियां हैं। ऐसी हरकतें रीढ़ की हड्डी और विशेषकर डिस्क पर भारी दबाव डालती हैं। यह खतरा उन लोगों के लिए और भी ज्यादा घातक हो जाता है जिन्हें पहले से ही स्पाइन या डिस्क से जुड़ी कोई तकलीफ रही हो।
इसके अलावा, कुछ फिटनेस प्रेमियों में यह गलत धारणा होती है कि वर्कआउट के दौरान होने वाले दर्द को सहन करने से मांसपेशियां मजबूत होती हैं। लेकिन लगातार बना रहने वाला या बढ़ता हुआ दर्द किसी अंदरूनी गंभीर चोट का संकेत होता है। बिना असल वजह का पता लगाए एक्सरसाइज जारी रखना लक्षणों को और बिगाड़ सकता है।
सुरक्षित वर्कआउट के लिए इन बातों का रखें ध्यान
एक सुरक्षित और प्रभावी फिटनेस रूटीन में सही तकनीक सीखना, अपनी फिटनेस के हिसाब से वजन चुनना और धीरे-धीरे रेजिस्टेंस बढ़ाना शामिल है। वर्कआउट से पहले वार्म-अप करना, भारी सेट के बीच पर्याप्त आराम करना और कोर मसल्स को मजबूत करना बहुत फायदेमंद होता है। शुरुआत करने वालों को हमेशा किसी सर्टिफाइड ट्रेनर की देखरेख में ही कसरत करनी चाहिए।
अगर वर्कआउट के बाद पीठ में दर्द महसूस हो, तो ऐसी हरकतों से बचें जो तकलीफ को बढ़ाएं। यदि दर्द तेज है, लगातार बना रहता है, या पैरों में सुन्नपन और कमजोरी के साथ आता है, तो तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर से परामर्श लें। एक्सरसाइज का मुख्य उद्देश्य लंबी उम्र तक सेहतमंद रहना होना चाहिए, न कि यह साबित करना कि आप कितनी शारीरिक तकलीफ झेल सकते हैं।
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